27 जुलाई 2018 आषाढ़ पूर्णिमा को सदी का सबसे लंबा चन्द्रग्रहण लगने जा रहा है। इससे पहले 31 जनवरी को इस साल पूर्ण चन्द्रग्रहण लगा था जिसमें करीब 1 घंटे 16 मिनट का खग्रास था। 27 और 28 जुलाई की मध्य रात्रि में लगने वाले चन्द्रग्रहण में करीब 1 घंटे 43 मिनट का खग्रास रहेगा। यह चन्द्रग्रहण शुरू होने से अंत होने तक करीब 4:05 घंटे का रहेगा। खगोल वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह 21वीं सदी का सबसे लंबा चन्द्रग्रहण होगा।
इस चंद्रग्रहण को पूरे भारत में देखा जा सकता है। भारत के अलावा यह चन्द्रग्रहण इत्यादि संपूर्ण एशिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, न्यूज़ीलैंड, जापान, बेल्जियम, पुर्तगाल, इंग्लैंड, हंगरी, टर्की, जकार्ता, ग्रीस, इटली, म्यांमार, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, रूस, चीन, ब्राज़ील, अर्जेंटीना, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागर इत्यादि भागों में यह चंद्र ग्रहण दिखाई देगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ०पुनीत गुप्ता ने बताया कि इस बार यह 21वीं सदी का सबसे लंबा चन्द्रग्रहण होगा। इस चंद्रग्रहण को पूरे भारत में देखा जा सकता है। ग्रहण का आरंभ 27 जुलाई की मध्य रात्रि में 11 बजकर 54 मिनट पर होगा और इसका मोक्ष काल यानी अंत 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर होगा। इस प्रकार से चन्द्र ग्रहण की कुल अवधि 04 घंटे 05 मिनट की होगी |
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस राशि में चन्द्रग्रहण होता है उस राशि के लोगों को कष्ट का सामना करना पड़ता है। ग्रहण मकर राशि में होने के कारण इस राशि के लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ग्रहण से जहां कई राशियों को अशुभ फल मिलने की आशंका है वहीं कुछ राशियों को लाभ और शुभ फल भी मिलने वाला है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार मिथुन, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के लिए यह ग्रहण शुभ रहेगा। राजनीतिक दृष्टि से यह ग्रहण ब्लूचिस्तान एवं कश्मीर में राजनीतिक अपद्रव को बढाने वाला है। इन क्षेत्रों में आतंकी घटनाएं हो सकती हैं। सफेद वस्तुओं और चांदी, मोती एवं घतुओं के दाम बढ़ेंगे।