क्या कहती है राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुंडली
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1 - भाग्य स्थान के स्वामी शनि जनता के भाव यानी चौथे भाव में विराजमान होकर राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। शनि जनता का कारक होते हैं और कन्या राशि के शनि को ज्योतिष में शुभ माना गया है। इसलिए अशोक गहलोत पर जनता का भरोसा कायम रहता है।
2 - शनि की दशम भाव पर दृष्टि और दशम भाव में गजकेसरी योग का होना अति शुभ है। दशम भाव में बने इस राजयोग के कारक छोटी सी जगह से शुरू हुआ उनका जीवन आज सीएम हाउस तक पहुँच गया है। गुरु स्वयं दशमेश है इसलिए केन्द्राधिपत्य राजयोग का भी निर्माण हो रहा है। शनि गुरु के आपसी दृष्टि संबंध के कारण धर्म में रूचि और सबको साथ लेकर चलने वाले है। इन पर कभी करप्शन का आरोप गुरु के कारन ही नहीं लगा।
3 - लग्नेश बुध जो की वाणी के कारक है वो साहस और पराक्रम भाव के स्वामी सूर्य के साथ लाभ भाव में उसी भाव के स्वामी मंगल के साथ विराजमान है। मंगल साहस का कारक है और सूर्य के साथ बैठकर सत्ता की बुलंदी देने का काम किया है। बुध मंगल की युति के कारण कुटनीति कूट कूट भरी है और इसलिए ही राजनीति का जादूगर इन्हे कहा जाता है।
4 - द्वादश भाव में शुक्र खुद बलवान होकर बैठे है और शनि से उनका त्रिकोण का संबंध है। इसके कारण उन्हें कांग्रेस के दूसरे राज्यों के चुनावी प्रभार का मौका मिलता है। महिलाओं के लिए लोक कल्याणकारी योजना लाकर इन्होने अच्छी लोकप्रियता हासिल की। जाहिर सी बात है इस चुनाव में इन्हे महिलाओं का साथ मिलने वाला है।
5 - नवम भाव में विराजमान राहु के कारण राज्य में सांप्रदायिक तनाव से हानि होती है। राहु की दृष्टि लग्न पर होने के कारण अपने ही आस पास के लोगों से जातक को खतरा होता है लेकिन ज्योतिष के नियम के अनुसार बुध बलवान होकर राहु के अशुभ प्रभाव को नष्ट करता है इसलिए राहु इन्हे इतना नुकसान नहीं दे पाया। सत्ता पक्ष को अस्थिर करने की कोशिश असफल हुई।
6 - इनकी कुंडली में 6 ग्रह नवम, दशम और एकादश भाव में विद्यमान है जिसके कारण कुंडली अति बलवान हो गई है। वर्तमान गोचर देखे तो अक्टूबर तक इन्हे परेशान करने की पूरी कोशिश होगी। उसके बाद इनकी जोरदार वापसी होगी। सम्भावना है कि दोबारा ये सीएम बने।
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