वैदिक ज्योतिष में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा गया है। बुध को बुद्धि, स्मरण शक्ति, ज्ञान, ज्योतिष, गणित, व्यापारी और जनवक्ता का कारक माना गया है। आज इस लेख में हम समझने की कोशिश करेंगे की बुध की जब अन्य ग्रहों के साथ युति होती है तो इसका क्या फल होता है।
सूर्य-बुध युति
कुंडली में अगर सूर्य बुध एक साथ है तो इसे बुध आदित्य योग कहा जाता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति बेहद ईमानदार और कुशल वक्ता होता है। सरकारी नौकरी से उसे फायदा होता है।
बुध-मंगल युति
कुंडली में अगर बुध मंगल एक साथ है तो व्यक्ति थोड़ा क्रोधी और जिद्दी हो जाता है। उसकी वाणी अक्सर कठोर होगी। शुभ प्रभाव में हो तो तकनीक का अच्छा जानकार होता है।
बुध-चन्द्रमा युति
कुंडली में अगर बुध चंद्र एक साथ है तो व्यक्ति निर्णय लेने में देरी करता है। ऐसे जातक की बुद्धि थोड़ी चंचल हो जाती है। अगर राजयोग बनाकर बैठे हो तो साहित्यकार बना देते हैं।
बुध-गुरु युति
बुध और बृहस्पति की युति अगर कुंडली में है तो जातक ज्ञानी और विद्वान होता है। ज्योतिष का बड़ा जानकार होगा। किसी बड़े राजनीतिक पद पर आसीन होगा।
बुध-शुक्र युति
अगर किसी जातक की कुंडली में बुध शुक्र एक साथ है तो ये लक्ष्मीनारायण योग है। ऐसा जातक कलात्मक कार्य में रूचि लेता है। बड़ा लेखक और अभिनेता भी बनता है। अनेक स्त्रियां मित्रता करने को आतुर रहती है।
बुध-शनि युति
अगर जातक की कुंडली में बुध शनि की युति है तो खोजी किस्म का ज्ञानी होगा। गणित में रूचि और वैज्ञानिक हो सकता है। ऐसा व्यक्ति वेद पाठी और इतिहास का ज्ञान रखने वाला होगा। गूढ़ विद्या में सफलता।
बुध-राहु युति
अगर कुंडली में बुध राहु की युति है तो जातक हवा हवाई बातें करता है। मित्रों से धोखा मिलता है। हालांकि बुध राजयोग बना रहा हो तो ऐसा व्यक्ति किसी राज्य का सीएम भी बन सकता है। राजनीति में अद्भुत सफलता देगा।
बुध-केतु युति
कुंडली में इन दोनों की युति जातक को हकला बना सकती है। वाणी दोष की कारक, त्वचा से जुड़े रोग जातक को होंगे। शुभ प्रभाव में होने पर प्रकांड ज्योतिषी और इन्द्रियों पर काबू करने वाला होगा। जातक को भविष्य की घटनाओं का आभास होगा।
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