वैदिक ज्योतिष में बीमारी का घर छठे भाव को माना जाता है और अष्टम भाव आयु का भाव है। तीसरा भाव भी अष्टम से अष्टम होने के कारण बीमारी की सूचना देता है। जैसे इस भाव में चन्द्रमा पीड़ित हो तो टीबी हो सकती है। अगर मंगल केतु पीड़ित है तो जातक को चोट लगने या शल्य क्रिया के योग बनते हैं। शुक्र गुरु से मधुमेह और शनि राहु के कारण जहर देकर मारने तक के योग बन जाते हैं। इस बारे में लाल किताब के भी कुछ सूत्र है जो इस प्रकार है।
1 - अगर सूर्य बुध गुरु या शुक्र के साथ पीड़ित हो तो जातक को सांस से जुड़ी बीमारी होती है।
2 - अगर चन्द्रमा राहु से युत होकर पीड़ित हो तो जातक को निमोनिया या पागलपन की बीमारी हो सकती है।
3 - शुक्र और राहु का अशुभ भाव में मेल नामर्दी का निशान माना गया है। ऐसे जातक को संतान पैदा करने में दिक्क्त आ सकती है।
4 - चन्द्रमा और मंगल के साथ बुध भी पीड़ित हो तो मानसिक कष्ट और मस्तिष्क से जुडी बीमारी होती है।
5 - अगर गुरु राहु से पीड़ित हो जातक को दमा, अस्थमा, लीवर विकार की दिक्क्त रहती है।
लाल किताब के अनुसार ग्रहों के उपाय भी है जिन्हे करने से जातक ग्रह पीड़ा से बच सकता है।
1 - सूर्य के लिए गेंहू, गुड़ और ताम्बे का दान करे और रात्रि को चूल्हे की अग्नि को दूध से बुझाओ।
2 - चन्द्रमा के लिए मोती, चावल और चीनी का दान बताया गया है।
3 - मंगल को शुभ करने के लिए देशी खांड और मसूर की दाल का दान करने का विधान है।
4 - बुध के लिए किन्नर की सेवा और साबूत मूंग की दाल का दान करना है।
5 - गुरु के लिए चने की दाल, केसर और हल्दी का दान करना है।
6 - शुक्र के लिए मंदिर में ज्वार, दही और हीरे का दान करना चाहिए।
7 - शनिवार के दिन शनि देव के लिए लोहे और पीतल का दान अवश्य करें।
8 - राहु को प्रसन्न करने के लिए जौ, गोमेद और सरसों का दान हितकारी बताया गया है।
9 - केतु के लिए गणेश जी की पूजा करे और शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाए।
लाल किताब के अनुसार हर ग्रह का अपना एक इष्ट होता है। सूर्य के विष्णु जी, चन्द्रमा के शिव जी, मंगल के हनुमान जी, बुध की दुर्गा माता, गुरु के श्री ब्रह्म जी, शुक्र की देवी लक्ष्मी, शनि के काल भैरव, राहु की देवी सरस्वती और केतु के लिए गणेश जी इष्ट है।
नोट - लाल किताब के अनुसार जो ग्रह अच्छा फल दे रहा है उसका दान और उपाय नहीं करते। उपाय करने से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ को जरूर दिखाए।
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