22 अप्रैल से गुरु चांडाल अशुभ योग बनेगा। दरअसल देवताओं के गुरु बृहस्पति अपनी अस्त अवस्था में ही मेष राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। मेष राशि एक अग्नि तत्व की राशि है जहां राहु सूर्य पहले से ही ग्रहण योग बनाकर विराजमान होंगे।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुछ ग्रह गोचर और युति ऐसी होती है जो पृथ्वी के लिए शुभ नहीं होती है। एक ऐसी ही ग्रह स्थिति 22 अप्रैल से बनने जा रही है। दरअसल देवताओं के गुरु बृहस्पति अपनी अस्त अवस्था में ही मेष राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। मेष राशि एक अग्नि तत्व की राशि है जहां राहु सूर्य पहले से ही ग्रहण योग बनाकर विराजमान होंगे। ऐसे में अस्त अवस्था में गुरु राहु की युति से बनने वाला ‘गुरु चांडाल’ योग भारत के लिए क्लेश का कारक होगा।
विज्ञापन
दरअसल कुंभ राशि में बेहद बलवान होकर बैठे शनि की नीच की दृष्टि मेष राशि पर होगी जिससे बेहद अशुभ प्रभाव इस देश पर देखने को मिलेगा। इस समय सुरक्षा के लिहाज से सेना और पुलिस को सतर्क रहना होगा। देश में आगजनी, हिंसा और दंगे बढ़ सकते हैं। भारत की कुंडली वृष लग्न की है और यह अशुभ योग द्वादश भाव में बनने से विदेश नीति प्रभावित हो सकती है। इस समय किसी भी बाहरी देश पर विश्वास करना सरकार के लिए गलत साबित हो सकता है। जंगलों में आग लगना, भूकंप आना और कोरोना की रफ़्तार के बढ़ने का आसार दिखाई दे रहे है।
अगर पीएम मोदी की कुंडली देखे तो इस समय शनि चन्द्रमा से चौथे भाव में विराजमान होकर ढैया का प्रभाव दे रहे हैं वहीं राहु गुरु सूर्य 22 अप्रैल को एक साथ जब शत्रु भाव में शनि से दृष्ट होंगे तो जाहिर सी बात है कि उन्हें उकसाने वाली कोई कार्रवाई देश में की जा सकती है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस देश के पीएम को हटाने की साजिश अपने चरम पर होगी। इस समय राजनीति में बेतुकी बयानबाजी बढ़ जाएगी।
विज्ञापन
सूर्य सत्ता का और गुरु सिंहासन का कारक है इसलिए ये दोनों जब पीड़ित होंगे तो सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाएगा। 10 मई को मंगल अपनी नीच राशि में प्रवेश कर शनि से षडाष्टक दोष बनाएंगे तो उस समय भारत में बड़े आतंकी हमलें की साजिश सामने आएगी और सुरक्षा एजेंसियों को इस समय बेहद सतर्क रहना होगा।