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फलित विचार: ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह का शुभ-अशुभ प्रभाव और सामान्य परिचय

Mon, 03 Apr 2023 08:40 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

वैदिक ज्योतिष में गुरु एक बेहद महत्वपूर्ण ग्रह है जो की दूसरे, पंचम और एकादश भाव के कारक होते हैं।
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ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण सूत्र है और वो है फलित विचार, दरअसल भविष्य में होने वाली किसी भी घटना के बारे में विचार करने को फलित विचार कहते हैं। फलित सूत्र में नॉर्मली 9 ग्रह, 12 भाव और 27 नक्षत्रों से विचार किया जाता है। फलित में 9 ग्रह है, सूर्य -चन्द्रमा-मंगल– बुध -गुरु-शुक्र-शनि, ये 7 मूल ग्रह माने गये हैं, वही 2 ग्रह राहु केतु छाया ग्रह माने गए हैं। राहु केतु सदैव एक दूसरे से सप्तम होते हैं और विपरीत यानी वक्री गति से ही चलते हैं तो आइये जानते हैं गुरु ग्रह के बारे में और साथ ही यह भी जानें कि ज्योतिष में उसकी क्या उपयोगिता है। 

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ज्योतिष में गुरु

  • वैदिक ज्योतिष में गुरु एक बेहद महत्वपूर्ण ग्रह है जो की दूसरे, पंचम और एकादश भाव के कारक होते हैं। गुरु 2 राशियों के स्वामी होते हैं। धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु देवताओं को सलाह देने का काम करते हैं इसलिए गुरु से प्रभावित जातक बड़े अच्छे सलाहकार होते हैं। 
  • गुरु धनु राशि में मूल त्रिकोण होकर बलवान होते हैं वही चन्द्रमा की राशि कर्क में विराजमान होकर उच्च हो जाते हैं। कर्क राशि में विराजमान गुरु अपने सभी शुभ फलों को प्रकट करने वाले होते हैं। विद्वानों के मत के अनुसार गुरु लग्न में, पंचम में, नवम में और एकादश भाव में बेहद शुभ फल देने वाले कहे गए हैं वहीं शनि की राशि मकर में गुरु नीच के माने जाते हैं और शुभ फल नहीं देते हैं। 
  • गुरु के नक्षत्र की बात करें तो पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद पर इनका अधिकार है। इन नक्षत्र में जो जातक जन्म लेते हैं उन पर गुरु का प्रभाव रहता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु बलवान होता है तो ऐसा व्यक्ति बेहद बुद्धिमान, वेद पुराण पढ़ने वाला और ज्ञानी होता है। गुरु ज्ञान के कारक होने के कारण जातक को उच्च पद पर आसीन करते हैं। शरीर के अंग की बात करे तो गुरु का पेट की चर्बी और लीवर पर अधिकार है। 
  • जब जातक की कुंडली में गुरु अस्त हो, पीड़ित हो, दु:स्थान में हो तो जातक को गुरु के अशुभ परिणाम मिलते है। गुरु धन संचय, संतान और लाभ के कारक भी है इसलिए गुरु पीड़ित होने से इन सब चीजो में बाधा आती है। गुरु की जाति ब्राह्मण है और स्थान मंदिर है। चंदन और पीले वस्त्र गुरु को प्रिय है और देवता श्री विष्णु है। वार गुरुवार है और भोग चने की दाल है। अगर किसी जातक की कुंडली में गुरु अशुभ फल दे रहा हो तो उसे हर गुरुवार श्री विष्णु के मंदिर में चने की दाल का दान करना चाहिए और अपनी नाभि में चंदन का तिलक लगाए।

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