Budh Gochar 2026: बुध का कुंभ राशि में गोचर
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03 फरवरी 2026 को बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क कारक ग्रह रात करीब 09 बजकर 38 मिनट पर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। ज्योतिष में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा प्राप्त है और यह सभी ग्रहों में सबसे अधिक फलदायी ग्रह माने जाते हैं। बुधदेव मिथुन और कन्या राशि के स्वामी ग्रह माने जाते हैं। इसके अलावा बुध कन्या राशि में उच्च के होते हैं और सभी ग्रहों में सबसे छोटा ग्रह होता है। बुध सूर्य के सबसे नजदीक रहने वाले ग्रह हैं ऐसे में ये जल्दी-जल्दी अस्त होते हैं। बुध के गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के साथ-साथ देश-दुनिया पर भी देखने को मिलता है। आइए जानते हैं मेष राशि वालों के ऊपर बुध के गोचर का कैसा प्रभाव पड़ेगा।
बुध का कुंभ राशि में गोचर और मेष राशि पर प्रभाव
- मेष राशि के जातकों के लिए बुध तीसरे और छठे भाव के स्वामी ग्रह होते हैं। जो 3 फरवरी को यह आपके ग्यारहवें भाव में गोचर करेंगे।
- बुध के गोचर करने से यह आपके भाग्य भाव में होगा। ऐसे में आपको भाग्य का साथ मिलेगा। साथ ही दोस्तों और मित्रों का भरपूर साथ मिलेगा।
- करियर के क्षेत्र में आपको यात्राएं करनी पड़ सकती है। इसके अलावा आपकी आर्थिक स्थिति में कई तरह के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
- जो लोग किसी तरह का व्यापार आदि करते हैं उनको बिजनेस पार्टनर संग किसी दूसरी योजनाओं का लाभ मिल सकता है।
- प्रेम जीवन में जीवनसाथी संग आपको ईमानदार रहना होगा और रिश्तों संग मजबूती रहेगी। सेहत के लिहाज से कुंभ का गोचर अच्छा रहेगा।
- मेष राशि के जातकों के लिए बुध आपके तीसरे और छठे भाव के स्वामी होते हैं।
- बुध के मकर राशि में गोचर करने से यह आपके दशम भाव में हैं। ऐसे में करियर-कारोबार के लिए यह अच्छा होगा।
- जो लोग विदेशों में नौकरी करते हैं उनके लिए वहां पर बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
- कार्यक्षेत्र में आपके काम की सराहना होगी। आपको अपनी क्षमता में वृद्धि होगी।
- जो लोग बिजनेस करने के इच्छुक हैं उनको अच्छा मुनाफा हासिल हो सकता है।
- नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग हैं और आप अपने प्रतिद्वदिंयों का जमकर सामना करना होगा।
- धन बचत करने में आपको कामयाबी मिलेगी और कुछ कठिन आर्थिक फैसले आप ले सकते हैं।
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ज्योतिष में बुध ग्रह
- - वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को सबसे छोटा और शुभ ग्रह माना जाता है।
- - सभी नवग्रहों में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा प्राप्त है।
- - बुधदेव को वाणी, व्यापार, गणित, तर्कशास्त्र, संचार, बुद्धि और त्वचा का कारक ग्रह माना जाता है।
- - ज्योतिष में बुध को द्विस्वभाव का ग्रह माना जाता है। यानी बुध ग्रह जिस ग्रह के साथ होते हैं उसकी के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
- - मिथुन और कन्या राशि का स्वामित्व बुध देव को प्राप्त है।
- - बुध शुभ ग्रहों के साथ होने पर शुभ फल और अशुभ ग्रहों के साथ होने पर अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर बुध ग्रह शुक्र,गुरु और बली चंद्रमा के साथ हों तो अच्छे फल प्रदान करते हैं। वहीं पापी ग्रहों के साथ होने पर जैसे राहु-केतु, शनि, सूर्य और मंगल तो अशुभ फल प्रदान करते हैं।
- - बुध सूर्य के सबसे नजदीक रहने वाले ग्रह हैं, जिस कारण से यह बार-बार अस्त हो जाते हैं।
- - बुध ज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती नक्षत्र के अधिपति ग्रह होते हैं।
- - कुंडली में बुध के मजबूत होने पर व्यक्ति बुद्धिमान, कूटनीतिज्ञ और राजनीति में कुशल होता है।