Budh Gochar 2025:कुंभ राशि के लिए पांचवे और आठवें भाव के स्वामी ग्रह हैं बुधदेव। ऐसे में बुध के वृषभ राशि में गोचर करने से यह चौथे भाव में गोचर कर चुके हैं। वैदिक ज्योतिष में कुंडली का चौथा भाव माता, सुख, वाहन, भूमि, मकान और सुख-सुविधाओं का होता है।
Budh Gochar 2025: बुध अब कुछ दिनों तक वृषभ राशि की यात्रा पर रहेंगे। ज्योतिष में बुध ग्रह को बहुत ही शुभ और प्रभावशाली माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में बुध शुभ स्थान पर होते हैं उनको जीवन में हर एक तरह की सफलता प्राप्त करते हैं। 23 मई 2025 को बुद्धि के कारक ग्रह शुक्र की राशि वृषभ राशि में गोचर करेंगे। बुध के गोचर करने से सभी 12 राशियों पर विशेष तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं बुध के गोचर से कुंभ राशि वालों पर कितना और किस तरह का असर देखने को मिलेगा।
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कुंभ राशि पर प्रभाव
कुंभ राशि के लिए पांचवे और आठवें भाव के स्वामी ग्रह हैं बुधदेव। ऐसे में बुध के वृषभ राशि में गोचर करने से यह चौथे भाव में गोचर कर चुके हैं। वैदिक ज्योतिष में कुंडली का चौथा भाव माता, सुख, वाहन, भूमि, मकान और सुख-सुविधाओं का होता है। कुंभ राशि वालों के लिए बुध का वृषभ राशि में गोचर बहुत ही शुभ साबित होगा। इस दौरान आपके जो काम नहीं हो पा रहे थे वह बहुत ही आसानी के साथ पूरे होंगे। चौथे भाव में बुध का होना कुंभ राशि वालों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। जो लोग इस दौरान कोई नया काम शुरू करने चाह रहे हैं उनके लिए यह बेहतरीन अवसर हैं। भाग्य का भरपूर साथ आपको मिलेगा। नौकरीपेशा जातकों को उनकी मेहनत का फल जरूर मिलेगा। तरक्की और वेतन में वृद्धि के योग हैं। इसके अलावा जो लोग रियल एस्टेट के काम-धंधे से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का गोचर बहुत ही फलदायी साबित होगा। वहीं इस दौरान आपको अपनी सेहत का विशेष ध्यान देना होगा।
बुध का कुंडली पर प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती हैं। यदि बुध जन्म कुंडली में लग्न भाव में हो, तो जातक संवाद में कुशल बनता है। इतना ही नहीं बुध के प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बढ़ता है और वह शारीरिक रूप से सुंदर बनता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो वह अक्सर बीमारियों से घिरा रहता है। इसके अलावा जातक पाचन शक्ति कमजोर, पेट दर्द और बालों की समस्याएं भी झेलता है। वहीं कुंडली में बुध की स्थिति सही न होने पर संवाद में दिक्कतें आने लगती है, जिस कारण रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही व्यापार में असफलता, नौकरी में तनाव और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं।