देश में एक बार फिर कोरोना के केस बढ़ने लगे है। पीएम मोदी ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए मीटिंग बुलाई है, वही देश की चिंता H3N2 वायरस ने भी बढ़ा दी है। डॉक्टर्स के मुताबिक सर्दी जुकाम खांसी के मामले भी गंभीर बीमारी का रूप ले रहे हैं जोकि चिन्ताजनक है। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर किन ग्रह -नक्षत्रों के कारण ऐसा हो रहा है और ये सिलसिला कब रुकेगा ?
वैदिक ज्योतिष में मौसमी बीमारी का कारक बुध को माना गया है ,वही केतु रहस्यमयी बीमारी का कारक है। शनि वायु प्रधान है जो चीजों को गति देता है। जीव कारक गुरु मनुष्य को प्राण देते हैं वहीं शुक्र संजीवनी का स्वामी होने के कारण विचारणीय ग्रह है।
इस देश में कोरोना के मामले शनि के नक्षत्र बदलते ही बढ़ने शुरू हो गए है। दरअसल शनि इस समय राहु के नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं और राहु पर उनकी नीच की दृष्टि भी है। राहु उग्र राशि मेष में विराजमान हैं तो जाहिर सी बात है कि कोरोना के केस गति पकड़ने लगे हैं। इसके अलावा H3N2 वायरस की जब हम बात करते हैं तो उसमें बुध की भूमिका नज़र आ रही है। बुध ने 16 मार्च को अपनी नीच राशि में प्रवेश किया। इस समय मीन राशि में गुरु सूर्य बुध विराजमान है और शनि उनसे द्वादश भाव में वही राहु दूसरे भाव में है।
मौसमी बीमारी का कारक बुध इस समय पाप कर्तरी योग में है केतु बुध का षडास्टक योग बना हुआ है। इसलिए ये संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहे है कि किसी रहस्य से जुड़ी बीमारी की इस समय में वृद्धि होगी। अगर हम और गहराई से समझे तो 28 मार्च को जीव कारक गुरु अस्त हो रहे हैं जिसका प्रभाव बीमारी के प्रसार के रूप में देखा जा सकता है। गुरु 22 अप्रैल को अस्त अवस्था में ही मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं और राहु के साथ युति कर गुरु चांडाल योग का निर्माण करेंगे।
31 मार्च से बुध भी जड़त्व योग का निर्माण कर शनि से दृष्ट होंगे। इस समय मंगल भी बुध की राशि में विराजमान होकर रक्त से जुडी बीमारी में वृद्धि कर रहे है। ऐसे में यह स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है कि अप्रैल और मई में यह बीमारी अपने उच्च स्तर पर होगी और 15 मई के बाद मरीजों की संख्या घटना शुरू हो जायेगी।