चैत्र पूर्णिमा (27 अप्रैल 2021) की रात सुपरमून दिखाई देगा। सुपर मून में चंद्रमा का आकार सामान्य पूर्णिमा की तुलना में कुछ बड़ा होगा और अधिक चमकदार नजर आएगा। इस मून को पिंक मून भी कहा जाता है। मंगलवार की शाम चंद्रमा करीब 7.09 बजे पूर्व उदित होगा जिसे रात भर देखा जा सकेगा। इस साल दो सुपरमून देखे जाएंगे। 27 अप्रैल के बाद 26 मई को भी सुपरमून दिखाई देगा।
ऐसा दिखाई देता है सुपरमून
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार सुपरमून में चंद्रमा तकरीबन 30 फीसदी अधिक चमकीला नजर आता है और लगभग 14 प्रतिशत अपने सामान्य आकार से बड़ा दिखाई देता है। परंतु वास्तव में चंद्रमा का आकार बड़ा नहीं होता है, बल्कि पृथ्वी से इसकी निकटता के कारण ऐसा प्रतीत होता है। क्योंकि इस घटना में चंद्रमा और पृथ्वी की दूरी सबसे कम हो जाती है।
क्या होता है सुपरमून?
सुपरमून पृथ्वी से दिखाई देने वाला चंद्रमा का एक बड़ा आकार है। दरअसल चंद्रमा की पृथ्वी के चक्कर काटने की कक्षा अंडाकार है। इस वजह से कई बार यह पृथ्वी के काफी पास तक आ जाता है, जिससे हमें उसका आकार सामान्य से बड़ा दिखाई देता है। यदि पूर्णिमा तिथि के दिन ऐसा हो तो इसे सुपरमून के नाम से जाना जाता है।
कब लगता है सुपरमून?
सुपरमून का संबंध पूर्णिमा तिथि से है। यानि जिस दिन पूर्णिमा (Full Moon) तिथि हो और चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदू पर हो तो इस स्थिति में ही सुपरमून लगेगा।
खगोल विज्ञान में सुपरमून
खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है। चंद्रमा का ऑर्बिट (कक्षा) अंडाकार होने की वजह से चंद्रमा और पृथ्वी के सबसे दूर बिंदू को एपोजी (Apogee) जबकि सबसे नजदीक बिंदु को पेरीजी (Perigee) के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति में सुपरमून तब होगा जब चंद्रमा पेरीजी पर पहुंचता है। जबकि एपोजी पर यह माइक्रोमून (Micro Moon) कहलाता है।