जिस प्रकार हर व्यक्ति की शक्लो
सूरत एक जैसी नहीं होती है। उसी प्रकार वाणी में भी समानता नहीं होती है। किसी की
आवाज भारी होती है तो किसी की पतली। किसी की आवाज को सुनकर बार-बार सुनने की चाहत
होती है तो किसी की आवाज सुनकर कान बंद कर लेने का मन करता है। समुद्र विज्ञान में
अंग लक्षण से किसी व्यक्ति के स्वभाव और गुणों को जानने का तरीका बताया गया है। इसी
विज्ञान में बताया गया है कि किसी की आवाज को सुनकर उसके व्यक्तित्व को जाना जा
सकता है।
समुद्रशास्त्र के अनुसार जो लोग बोलते समय बीच में अटकते हैं
उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है। ऐसे लोग कभी-कभी छोटी बातों पर भी उग्र हो जाते
हैं। कई बार इनका निर्णय दूसरों से प्रभावित होता है। इसके विपरीत जो व्यक्ति अपनी
बातों को स्पष्ट और साफ शब्दों में कहता है वह आत्मविश्वास से भरपूर होते हैं। ऐसे
लोग जल्दी किसी के प्रभाव में नहीं आते हैं।
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो
साफ और स्पष्ट बोलते हैं लेकिन किसी शब्द पर अधिक जोर देते हैं। इस प्रकार बोलने
वाले व्यक्ति में दिखावा करने की प्रवृति होती है। यह हर चीज को बढ़ा-चढ़ाकर बोलते
हैं। जो लोग जल्दी-जल्दी बोलते हैं उनके विषय में माना जाता है कि इन्हें लगता है
कि सामने वाला व्यक्ति इनकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है इसलिए अपनी बात जल्दी से जल्दी
रख देना चाहता है। ऐसे लोगों में गंभीरता की कमी होती है। इस तरह से बोलने वाले लोग
उतावले होते हैं।
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके शब्द बोलते समय टूटते रहते
हैं, वाणी कर्कश होती है। इनके विषय में कहा जाता है कि यह लक्ष्य के प्रति गंभीर
नहीं होते हैं। किसी बात पर तुनक कर वाद-विवाद में उलझ जाते हैं। ऐसे लोगों के जीवन
में सुख-दुःख धूप-छांव की तरह बना रहता है। जिन लोगों की वाणी गंभीर होती है वह
शांत स्वभाव के होते हैं। जल्दी किसी बात पर उग्र नहीं होते हैं। ऐसे लोगों में
मैनेजमेंट की योग्यता अधिक होती है। समाज एवं परिवार में इनकी स्थिति मजबूत होती
है। ऐसे लोगों जहां भी होते हैं इन्हें आदर मिलता है।