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कुण्डली नहीं हस्ताक्षर से चुनिए लाइफ पार्टनर

Sat, 15 Dec 2012 04:09 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
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सुखी वैवाहिक जीवन के लिए कुण्डली मिलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास कुण्डली नहीं होती और न ही जन्म समय का सही विवरण होता है। ऐसे में अपने लिए सुयोग्य लाइफ पार्टनर आप कैसे चुन सकते हैं, जिसके साथ फैमली लाइफ स्मूथ चले। यह एक बड़ी समस्या तब बन जाती है जब विवाह के लिए रिश्ते आने लगते हैं।
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इस समस्या के समाधान के लिए कैलीग्राफी में उपाय बताए गये हैं। इससे आप बिना कुण्डली के योग्य जीवनसाथी का चुनाव कर सकते हैं। इस तकनीक में वर वधू का हस्ताक्षर मिलाकर देखा जाता है। दोनों के हस्ताक्षर में जितनी समानता मिलती है माना जाता है कि वर-वधू के उतने ही गुण मिलते हैं। जन्म कुण्डली के समान इस तकनीक में भी गुण मिलान की सर्वक्षेष्ठ संख्या 36 है।

कैलिग्राफी एक्सपर्ट चन्द्रप्रभा बताती हैं कि यह तकनीक मनोविज्ञान के सिद्धांत पर काम करता है। व्यक्ति की सोच और उसके व्यक्तित्व का हर पहलू व्यक्ति के हस्ताक्षर और लिखावट में उभरकर आता है। व्यक्ति का दूसरे के प्रति व्यवहार और भावना भी हस्ताक्षर में उभर कर आता है। हस्ताक्षर से किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को जानने के लिए यह बेहद जरूरी है कि व्यक्ति बिना रूके हस्ताक्षर करे। बिना रूके पूर्ण गति से जो हस्ताक्षर किया जाता है उससे हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति का सही आंकलन हो पाता है।
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ऐसे मिलाते हैं वर-वधू के हस्ताक्षर
वर और वधू के हस्ताक्षर को मिलाते समय देखा जाता है कि दोनों हस्ताक्षर में कितनी समानता है और कितनी असमानता है। दोनों के हस्ताक्षर में कितने अतिरिक्त चिह्नों का प्रयोग हुआ है। बहुत से लोग हस्ताक्षर के ऊपर लाईन खींचते हैं, बहुत से नीचे और कुछ व्यक्ति सीधा और सुस्पष्ट हस्ताक्षर करते हैं। हस्ताक्षर में अक्षरों के बीच कितनी दूरियां हैं। इसके अलावा हस्ताक्षर की अन्य बारीकियों पर भी विचार किया जाता है। इन सभी को परखने के बाद वर-वधू के गुण सामने आते हैं। इसके लिए किसी कैलीग्राफी एक्सपर्ट की मदद लेनी होगी।
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