जीवन में सफलता के लिए भाग्य का सहयोग जरुरी है। अगर भाग्य आपका सहायक नहीं हो तो आप भले ही खूब मेहनत करें आपको वैसी सफलता नहीं मिलती है जिसके आप हकदार होते हैं।
इसलिए आप भी अपनी हथेली में भाग्य रेखा को देखिए कि आपकी भाग्य रेखा क्या कहती है। क्या आपको भाग्य का सहयोग मिलेगा और आप जीवन में उस ऊंचाई तक पहुंच सकेंगे जिसकी आप चाहत रखते हैं।
भाग्य का फल आपको किस उम्र में और किसके सहयोग से मिलेगा। यह सब आप अपनी हथेली में मौजूद भाग्य रेखा से जान सकते हैं तो चलिए, देखते हैं अपनी भाग्य रेखा।
आपकी हथेली में भाग्य रेखा कहां है
भाग्य रेखा को समझने के लिए सबसे पहले यह जानिए कि आपकी हथेली में भाग्य रेखा कहां है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार हथेली में शनि पर्वत मध्यमा उंगली की जड़ में स्थित होता है। इसे हथेली में शनि का स्थान कहा जाता है।
हथेली में किसी भी स्थान से चलकर जो रेखा शनि पर्वत तक पहुंच जाती है वह रेखा भाग्य रेखा कहलाती है।
लेकिन भाग्य रेखा का उद्गम कहां से हुआ है और किस तरह से शनि पर्वत तक पहुंची है यह रेखा इसी आधार पर यह तय किया जाता है कि किसी व्यक्ति का भाग्य कितना बलवान है और किसे भाग्य का कितना सहयोग मिलेगा।
पत्नी या किसी स्त्री के सहयोग से तरक्की
जिस व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा का उद्गम चन्द्र पर्वत से होता है तो किसी स्त्री के सहयोग से व्यक्ति को भाग्य का फल मिलता है यानी ऐसा व्यक्ति स्त्री के सहयोग से जीवन में उन्नति करता है।
ऐसे व्यक्ति अपनी पत्नी से सलाह लेकर या पत्नी के साथ मिलकर कोई काम करें तो यह तेजी से उन्नति की ओर बढ़ते जाते हैं।
किसी लड़की की हथेली में ऐसी रेखा होने पर उसे पुरुष साथी के सहयोग से कामयाबी मिलती है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार जिन लड़कियों की हथेली में ऐसी रेखा होती है उनकी शादी किसी धनवान परिवार में होती है या शादी के बाद वह परिवार धनवान हो जाता है।
सगे संबंधियों से भाग्य वृद्घि
जिस व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा का उद्गम जीवन रेखा से आरंभ होता है उसे अपनी मेहनत का पूरा पूरा फल मिलता रहता है और यह जीवन में खूब कामयाब होते हैं। लेकिन इसमें इनके सगे-संबंधियों का बहुत योगदान होता है।
सगे-संबधी इन्हें इस योग्य बनने में सहयोग देते हैं कि व्यक्ति अपने बूते जीवन कामयाबी प्राप्त कर सके।
अगर भाग्य रेखा जीवन रेखा के पास से आरंभ हो लेकिन जीवनरेखा का स्पर्श न करें तो व्यक्ति अपने परिवार का विशेष ध्यान रखता है जिसके कारण कई बार उसे अपनी कामयाबी के साथ समझौता भी करना पड़ता है।
कामयाबी की ऊंचाई तक पहुंचा देता है भाग्य
जिस व्यक्ति की भाग्य रेखा का आरंभ हथेली के मध्य भाग से होता है उन्हें जीवन के शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ता है। युवावस्था में आने के बाद इन्हें अपने परिश्रम और योग्यता से भाग्य का साथ मिलना आरंभ होता है।
अगर भाग्य रेखा कटी हुई नहीं हो तो मध्यायु के बाद जीवन में निरंतर कामयाबी मिलती है। भाग्य रेखा का उद्गम कलाई के पास मणिबंध रेखा से हो रहा है और यह रेखा सीधी चलकर शनि पर्वत पर पहुंच रही है तो यह प्रबल भाग्यवान होने का संकेत है।
ऐसे व्यक्ति भाग्य के सहयोग और अपनी मेहनत से कामयाबी की ऊंचाई तक पहुंचने में सफल होता है।
विवाह के बाद भाग्य का सहयोग
अंगूठे के नीचे जीवन रेखा से घिरा होता शुक्र पर्वत। हस्तरेखा विज्ञान के
अनुसार अगर इस स्थान से कोई रेखा निकलकर शनि पर्वत पर पहुंचता है तो विवाह के बाद
व्यक्ति को भाग्य का सहयोग मिलता है।
ऐसा व्यक्ति किसी कला के माध्यम से प्रगति
करता है। लेकिन इनके जीवन पर कई बार संकट के बादल मंडराते हैं क्योंकि भाग्य रेखा
जीवनरेखा को काटकर आगे बढ़ती है।