मंगल और राहु का बुध की राशि मिथुन में आना कई अप्रत्याशित घटनाओं को जन्म देगा। राहु मिथुन राशि में उच्च राशि के माने गए हैं। बुध के साथ उनकी युति राहु के दोष को तो कम करेगी लेकिन मंगल के कुदोष को बढ़ा देगी, क्योंकि मंगल के बुध शत्रु हैं। ऐसे में शत्रु के भाव में जाने से मंगल अपने आपको असहज महसूस करेंगे, लेकिन बुध मंगल को अपने बराबर समभाव रखते हैं। ऐसे में बुध की तरफ से कोई दिक्कत नहीं होगी।
मंगल ऊर्जा के ग्रह हैं और इन पर और राहु पर शनिदेव की दृष्टि भी पड़ रही है, अत: मंगल और शनि का समसप्तक योग बना हुआ है। मंगल राहु शनि और केतु मारक दृष्टि रख रहे हैं। शनि और केतु मंगल और राहु पर मारक दृष्टि रख रहे हैं। ब्रह्मांड में चार क्रूर और पाप ग्रह मिलकर अशुभ योग बनाएंगे। मेदिनी ज्योतिष के अनुसार यह योग पृथ्वी पर अग्निकांड और अत्यधिक आंधी-तूफान को बढ़ाएंगे। चूंकि यही योग स्वतंत्र भारत के लग्न कुंडली के द्वितीय और अष्टम भाव में बना हुआ है अत: भारत में कहीं न कहीं जातिवाद, सांप्रदायिक या आतंक को बल मिलेगा। यद्यपि राहु का दोष मंगल कम कर देंगे, फिर भी छाया ग्रह राहु मंगल के प्रभाव में आग में घी डालने का काम करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार छायाग्रह राहु और केतु जिस ग्रह के साथ रहते हैं, उसी के प्रभाव में वृद्धि करते हैं। इसलिए यह युति अद्भुत परिणाम देगी। इसी योग में वायुयान की दुर्घटनाएं सर्वाधिक होती हैं।
12 राशियों के लिए मंगल, शनि, राहु और केतु का परस्पर दृष्टि संबंध कैसा रहेगा, इसका ज्योतिषीय विश्लेषण जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —