Mangal Vakri Rashi: वैदिक ज्योतिष में कोई ग्रह वक्री गति में होने पर भी पीछे या विपरीत दिशा में गति करता हुआ प्रतीत होता है। यद्यपि वक्री ग्रहों के अनुकूल और प्रतिकूल दोनों प्रभाव हो सकते हैं, मंगल के वक्री होने का लोगों के जीवन पर विशेष रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि इसे ऊर्जा उत्पन्न करने वाला ग्रह माना जाता है। जब मंगल इस तरह की स्थिति में होता है और वक्री होता है, तो जातकों के लिए यह जानना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है कि अपनी ऊर्जा कहां लगाएं। नतीजतन, अधिकांश जातक इस दौरान अपनी ऊर्जा बर्बाद करते हुए दिखाई देते हैं, जिससे उनके निजी जीवन में समस्याएँ आती हैं।वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल का व्यक्ति के वैवाहिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। मंगल पर मेष और वृश्चिक राशि का शासन है और इसे वीरता, शक्ति, पराक्रम और भूमि का प्रतीक माना जाता है। लेकिन बात अगर नक्षत्रों की करें तो मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मकर राशि में उच्च का और कर्क राशि में कमजोर होता है। मांगलिक दोष या मंगल दोष, जिसके कारण जातक को विवाह संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, कुंडली में ही मंगल के कारण होता है। ग्रहों के सेनापति कहे जाने वाले मंगल ग्रह ने 16 अक्टूबर को वृषभ राशि में प्रवेश किया था। अब 30 अक्टूबर की शाम 06 बजकर 54 मिनट पर वक्री हो चुके हैं। मंगल अब उल्टी चाल चलेंगे। वक्री ग्रह जहां कुछ राशियों को शुभ परिणाम देता है वहीं वह कुछ राशियों को अशुभ परिणाम भी देता है। आइए जानते हैं कौन सी हैं वो राशियां जिन्हें सावधान रहने की जरूरत है।