15 जनवरी को मकर संक्रांति है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के मकर राशि में गोचर को मकर संक्रांति कहते हैं। माघ महीने में सूर्य के राशि परिवर्तन से सूर्य की स्थिति बदलती है। सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। शास्त्रों में सूर्य उपासना, सूर्य को जल देने और इससे होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से बताया गया है। कुंडली में सूर्य की शुभ स्थिति से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
सूर्य को जल अर्पित करने के नियम
ज्योतिष में सूर्य को आत्मा का कारक बताया गया है। नियमित सूर्य को जल देने से आत्म शुद्धि और आत्मबल प्राप्त होता है। सूर्य को जल देने से आरोग्य लाभ मिलता है।
सूर्य को नियमित जल देने से सूर्य का प्रभाव शरीर में बढ़ता है और यह आपको ऊर्जावान बनाता है। कार्यक्षेत्र में आपको इसका लाभ मिलता है।
जिनकी नौकरी में परेशानी चल रही हो तो नियमित रूप से सूर्य को जल देने से उच्चाधिकारी से सहयोग मिलता है और मुश्किलें दूर होती हैं।
सूर्य को जल तांबे के बर्तन से अर्पित करना चाहिए।
सूर्य को जल देने से पहले उसमें चावल, लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।