मेष लग्न के जातकों का स्वभाव
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मेष लग्न चर लग्न है और अग्नितत्व भी है इसलिए आप सदा जल्दबाजी में रहते हैं और निर्णय लेने में एक पल नहीं लगाते हैं जबकि आपको एक बार दूरगामी परिणामों पर भी एक नजर डालनी चाहिए। मेष लग्न होने से आप आदेश सुनना कतई पसंद नहीं करते हैं और अपनी मनमानी ही चलाते हैं लेकिनआप बात सभी की सुनेंगे।
वहीं जो आपके मन में होता है। आपको किसी के दबाव में रहना नही भाता है और स्वतंत्र रुप से रहना पसंद करते हैं। अपनी स्वतंत्रता के साथ किसी तरह का कोई समझौता आप नहीं करते हैं। आपको अति शीघ्र ही क्रोध भी आता है और आप एकदम से आक्रामक हो जाते हैं, लेकिन आपके भीतर दया की भावना भी मौजूद रहती है।
आप दृढ़ निश्चयी होते हैं, आप व्यवहार कुशल भी होते हैं। आप जो भी बात कहते हैं उसे बिना किसी लाग लपेट के स्पष्ट शब्दों में कह डालते हैं। चाहे किसी को अच्छा लगे या बुरा लगे। इससे कई बार आपको लोग अव्यवहारिक भी समझते हैं।
मेष लग्न के जातक की खूबी हैं कि इनकी शक्ति व साहस किसी भी तरह की चुनौती का सामना निःसंदेह कर सकते हैं। यह स्वतंत्र विचार धारा के होते हैं। कभी-कभी इनमें उग्रता व ज़िद्दीपन का स्वभाव देखा गया हैं।
इस लग्न के जातक उत्साह व आशावादी होते हैं। लेकिन मंगल के स्वभाव के कारण धैर्य कि कमी देखने को मिलती हैं। इस लग्न के जातक अपने मान सम्मान को चोट नहीं लगने देते हैं। इनका स्वभाव निरंतर अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ना है। इस लग्न के जातक का कद ज्यादातर मध्यम ही देखा गया हैं। इनके चेहरे पर हल्की मुस्कान देखने को मिलती हैं।
यह लालिमा युक्त होते हैं। यह देखने से गुस्से वाले प्रतीत होते है। यह साहसी, आत्मविश्वासी, स्पष्टवादी, महत्वाकांक्षी व अत्यधिक परिश्रमी होते हैं। इस लग्न में यदि मंगल मजबूत स्थिति में हुआ तो ज्यादातर सेना, शासन प्रशासन, पुलिस आदि में देखने को मिलते हैं। इनमे कुछ कर गुजरने की क्षमता होती हैं।
मेष लग्न के लिए मंगल, गुरु, चंद्रमा, सूर्य शुभ गृह होते हैं और शुक्र, बुध मारक व शनि सम प्रभाव देते है।
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अब बात करते है इनके 12 भाव की
मेष लग्न के लिए मंगल, गुरु, चंद्रमा, सूर्य शुभ गृह होते हैं और शुक्र, बुध मारक व शनि सम प्रभाव देते है।
1. मंगल प्रथम और अष्टम भाव का स्वामी है। अष्टम भाव को मारक भाव बोलते हैं। परन्तु शास्त्रों में विदित हैं कि लग्न का स्वामी सदैव शुभ फल प्रदान करता हैं। अतः मंगल कुंडली में कारक ग्रह माना जाएगा।
2. दूसरे और सातवें का मालिक शुक्र है जो कि दो मारक भाव का स्वामी हैं। अतः अपनी महादशा या अंतर्दशा में कुछ नकारत्मक प्रभाव दे सकता है। लेकिन सप्तम भाव जीवनसाथी का भी भाव है तो इससे वैवाहिक जीवन को देखते हैं।
3. तृतीयेश और षष्ठेश बुध इस लग्न में कम मारक ग्रह होते है। यहां बुध जातक को दूरदर्शी बनाता है व इनमें बोलने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है।
4. चर्तुथ भाव का स्वामी चंद्रमा है। अतः इस लग्न के जातक पर अपनी मां का प्रभाव ज्यादा पड़ता है। चंद्रमा कारक ग्रह है। अतः यह अपने निर्णय अपने मन के अनुसार लेते है। यह भावुक स्वभाव के होते है।
5. पंचम भाव का स्वामी सूर्य यह परम योग कारक ग्रह बनता है। इस लग्न में लग्नेश, चतुर्थेश या पंचमेश का संबंध राजयोग कारक माना गया हैं।
6. नवम और द्वादश भाव का स्वामी गुरु भाग्येश हैं। इसके फस्वरूप यह परम योग कारक गृह हैं मेष लग्न की कुंडली में। गुरु का लग्न और लनेश पर प्रभाव जातक को धार्मिक प्रवृत्ति का बनाएगा। कुंडली में गुरु की दृष्टि जिस भी भाव व ग्रह पर पड़ेगी उसमें शुभता आएगी।
7. मेष लग्न में दसवें और एकादश भाव का स्वामी शनि है। कुंडली में शनि भी दसवें और एकादश का स्वामी होने से अशुभ ही माना जाता है। दसवां भाव केन्द्र होने से तटस्थ हो जाता है और एकादश भाव त्रिषडाय भावों में से एक है। मेष लग्न की कुंडली में कुंडली में शनि बाधक का काम भी करता है क्योंकि यह एकादश भाव का स्वामी है। कुंडली के लग्न में चर राशि मेष स्थित है और चर लग्न के लिए एकादशेश बाधक होता है।
मेष लग्न के जातकों के लिए हनुमान जी की पूजा करना अत्यंत लाभदायक होगा।
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आइए अंत में अब हम मेष लग्न के जातकों के लिए पूजा व रत्नों के बारे में बता दें कि उनके लिए क्या उचित रहेगा। आपके लिए हनुमान जी की पूजा करना अत्यंत लाभदायक होगा। आपको नियमित रुप से हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। इसके लिए आप हनुमान चालीसा आदि का पाठ कर सकते हैं। मंगलवार के दिन सुंदरकांड का पाठ भी आपके लिए शुभ रहेगा।
आपकी जन्म कुंडली में सूर्य पांचवें भाव का स्वामी होता है और पांचवां भाव त्रिकोण भाव है। इस भाव से हम संतान, शिक्षा व प्रेम संबंध देखते हैं। इसलिए आपको सूर्य को जल अवश्य देना चाहिए और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना आपके लिए शुभ होगा।
आपकी जन्म कुंडली में आपके भाग्य भाव के स्वामी बृहस्पति देव हैं। भाग्य को मजबूत बनाए रखने के लिए विष्णु जी की पूजा नियमित रुप से आपको करनी चाहिए।
आप नियमित रुप से विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी करें। यह आपके लिए अत्यंत लाभदायक होगा। मेष लग्न होने से आपके लिए मूंगा, माणिक्य और पुखराज शुभ रत्न हैं। आप इन्हें धारण कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त कुंडली में जिस ग्रह की दशा चल रही होती है उसके मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए क्योंकि जन्म कुंडली में जिस ग्रह की दशा चलती है उसी के अनुसार जीवन में फलों की प्राप्ति होती है।