कालभैरव अष्टमी 2018
इस पूजन विधि से होगी भगवान भैरव की विशेष कृपा —
---भगवान कालभैरव को फूलमाला, नारियल, दही वड़ा, इमरती, पान, मदिरा, गेरुआ सिन्दूर, चांदी वर्क और धूप-दीप अर्पित करें।
---बटुक भैरव पंजर कवच का पाठ करने से शरीर की रक्षा, लक्ष्मी प्राप्ति, योग्य पत्नी, ग्रह बाधा, शत्रुनाश और सर्वत्र विजय प्राप्त होती है।
---भैरव जी के 108 नाम माला का जाप करने से मनोकामना पूरी होती है। किसी भी प्रकार का अनिष्ट होने की सम्भावना हो या भयंकर आर्थिक समस्या, इन नाम का पाठ करने से और हवन करने से कष्ट दिन प्रतिदिन दूर जाता है।
---श्री बटुक भैरव आपदुद्धारक मंत्र ( ॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा) के जाप से शनि की साढ़े साती, ढैय्या, अष्टम शनि और अन्य ग्रहों के अरिष्ट का नाश होता है और शनिदेव अनुकूल होते हैं।
---नित्य भैरव चालीसा के पाठ से बड़े से बड़ा कष्ट भी समाप्त हो जाता है। कोर्ट-कचहरी के मामलों से भी मुक्ति मिलती है और प्रेत बाधा की भी मुक्ति मिलती है।
---श्री कालभैरव अष्टकम् का पाठ करने से ज्ञान, पुण्य, सद्मार्ग, ग्रह बाधा से मुक्ति, पर्याप्त लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
---श्री शिव दारिद्रयदहन स्तोत्र का पाठ करने से दरिद्रता का नाश होता है और स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
---श्री भैरव यंत्र की पूजा एवं स्थापना से घर के कष्ट-क्लेश समाप्त होते हैं एवं भूत/प्रेत बाधा भी शांत होती है।
---काले श्वान/कुत्ते को दूध पिलाने से और भोजन कराने से योग्य संतान प्राप्त होती है और संतान से जुड़ी समस्याओं का अंत होता है। ऐसा करने से केतु की भी शांति होती है।
---इस दिन भगवान भैरव जी के प्रमुख मंदिर जैसे कि काशी, हरिद्वार, उज्जैन और दिल्ली में दर्शन करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।