शनि महाराज पिछले साल नवंबर में
ही अपनी उच्च राशि तुला में आ गये चुके हैं। और सूर्य देव 13 अप्रैल को अपनी उच्च
राशि मेष में प्रवेश करेंगे।
इस राशि में सूर्य देव 14 मई तक रहेंगे। इससे
सूर्य और शनि आमने-सामने आ जाएंगे। इस स्थिति को ज्योतिषशास्त्र में समसप्तक योग
कहा गया है।
सूर्य और शनि यूं तो हर साल समसप्तक होते हैं लेकिन 30 वर्ष के
बाद ऐसी स्थिति बनी है जब सूर्य और शनि दोनों उच्च राशि में एक-दूसरे से आमने
सामने होंगे। यह स्थिति ऐसी है जब दोनों ग्रह उच्च राशि में होते हुए भी उच्च का फल
नहीं दे पाएंगे।
इसका कारण यह है कि दोनों ग्रह एक दूसरे के शत्रु हैं। ऐसे
में दोनों एक दूसरे के प्रभाव को कम करने की कोशिश करेंगे। हांलाकि सूर्य के सामने
शनि नहीं ठहरता है इसलिए वह अति वक्री होकर तुला से कन्या की ओर चलने लगेगा।
लेकिन दोनों ग्रहों के एक दूसरे के आमने-सामने आने का परिणाम यह होगा कि
सरकार और जनता के बीच टकराव की स्थिति बनेगी। इसका कारण यह है कि सूर्य सरकार का और
शनि जनता का कारक ग्रह है।
सूर्य और शनि का अन्य ग्रहों का संबंध भी ऐसा बन
रहा है कि राजनीति में साम्प्रदायिक और जातिवादी राजनीति उग्र होगी। मर्यादाविहीन
बयानबाजी का दौर चलता रहेगा।
प्राकृतिक आपदा एवं मानवजनित दुर्घटना की
आशंका रहेगी। भ्रष्टाचार के बड़े मामले उजागर हो सकते हैं। नौकरी करने वाले लोगों
के लिए उचित होगा कि मई महीने तक संयम से काम लें। उच्चाधिकारी एवं कर्मचारियों के
बीच माहौल तनावपूर्ण हो सकता है।