रत्नों का प्रभाव व्यक्ति की सोच और व्यवहार पर होता है। यह स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सभी रत्नों की अपनी खूबियां होती हैं और यह अपने संबंधित ग्रह की उर्जा को अवशोषित करके रत्न धारण करने वाले को शुभ और अशुभ फल प्रदान करती हैं।
नवग्रहों में छठा ग्रह है शुक्र। यह धन, वैभव, भौतिक सुख, वैवाहिक जीवन का सुख, सौन्दर्य, कला और संगीत का कारक है। इस ग्रह का रत्न है हीरा।
यह सभी रत्नों में कठोर और चमकीला होता है। इसे रगड़ने पर भी खरोंच नही आती है। इसलिए संस्कृत में इसे वज्रमणि कहा गया है।
जिनकी राशि या लग्न तुला अथवा वृष है उनके लिए हीरा सुख-समृद्घि के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम होता है।
इनके अलावा हीरा मिथुन, कन्या, तुला, मकर एवं कुंभ राशि वालों के लिए भी फायदेमंद होता है।
ज्योतिषशास्त्र के ग्रंथों में लिखा है कि हीरा धारण करने से धनागमन के मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
भौतिक सुख के साधनों में इजाफा होता है। इस रत्न को धारण करने से सौन्दर्य बढ़ता और दांपत्य जीवन में प्रेम एवं सहयोग की वृद्धि होती है।
असली हीरे की पहचान
असली हीरा धूप में रखने पर उसमें से इन्द्रधनुष की तरह किरणें दिखाई देती हैं।असली हीरा पारदर्शी होता है यानी इसके आर-पार देखा जा सकता है।इसका किनारा नुकीला होता है।हीरा धारण करने की विधि
भरणी, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में शुक्रवार के दिन शुक्ल पक्ष में धारण करना चाहिए।हीरा सोने की अंगूठी में धारण करना चाहिए।धारण करने से पहले 16 हजार बार शुक्र बीज मंत्र 'ओम द्रां, द्रीं, द्रौं सः शुक्राय नमः' का जप करेंधारण करने के सात वर्ष बाद यह प्रभावहीन हो जाता है। इसलिए पुनः अभिमंत्रित करके धारण करना चाहिए अथवा नया रत्न धारण करना चाहिए।