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राहु और केतु को खुश करने का शुभ दिन आज से शुरू

Thu, 19 Sep 2013 03:42 PM IST
टीम डिजिटल
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आज भाद्र मास की पूर्णिमा तिथि है शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन पितृ लोक से पितरगण पृथ्वी पर पधारते हैं इसके साथ ही पितृ पक्ष शुरू हो जाता है। आश्विन अमवस्या तिथि को यह पक्ष समाप्त होता है।
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यानी कुल मिलाकर 15 दिनों का यह समय पितरों को खुश करने का होता है। लेकिन जिनकी कुण्डली में राहु केतु अशुभ स्थिति में हैं, उनके लिए यह समय इन दोनों ग्रहों को अनुकूल बनाने के लिए भी उत्तम माना गया है।

ज्योतिषशास्त्र में कहा गया है कि जिनकी कुण्डली राहु केतु के बीच में सभी ग्रह होते हैं उनकी कुण्डली में कालसर्प दोष बनता है। चन्द्र अथवा सूर्य के साथ इन दोनों ग्रहों के होने पर ग्रहण नाम का अशुभ योग निर्मित होता है। माना जाता है कि राहु केतु से बनने वाले यह अशुभ योग पितरों के नाराज होने पर कुण्डली में मौजूद होता है।
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जो लोग पूर्व जन्म में पितृपक्ष में पितरों का श्राद्घ नहीं करते हैं उनके पितर नाराज होकर श्राप देते हैं। जिससे ऐसे समय में व्यक्ति का जन्म होता है जिससे उनकी कुण्डली में यह अशुभ योग बन जाता है। इस अशुभ योग के कारण व्यक्ति को जीवन में बार-बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है।

ऐसे खुश करें राहु केतु को
इस अशुभ योग के प्रभाव को दूर करने के लिए पितृ पक्ष में कुत्तों को मीठी रोटी खिलानी चाहिए। कुत्तों को केतु का प्रतिनिधि माना जाता है। शास्त्रों में कहा भी गया है कि श्राद्घ पक्ष में कुत्तों को भोजन देना चाहिए। काले तिल का दान एवं ब्राह्मणों को भोजन करवाने से पितृगण खुश होते हैं और जिससे राहु केतु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।

पितृपक्ष में हर दिन पीपल के जड़ में जल देना चाहिए एवं मिठाईयों का भोग लगाना चाहिए। इससे भी पितर संतुष्ट होते हैं। घर पर अगर कोई अनजान व्यक्ति आ जाए तो उसका निरादर नहीं करें। भोजन करवाकर आदर पूर्वक विदा करना चाहिए। इन उपायों से पितृगण एवं राहु केतु खुश हो जाते हैं और इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।
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