2009 लोकसभा चुनावों में लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के 'पीएम इन वेटिंग' थे, लेकिन पार्टी को उनके नेतृत्व में हार का सामना करना पडा़।
2014 में वे एक बार फिर पीएम इन वेटिंग बनने की इच्छा रखते हैं, लेकिन इस बार नरेंद्र मोदी उनकी राह में रोड़ा बन गए हैं। आडवाणी इससे नाराज हैं और अपने इस्तीफे के रूप में एक नया दांव खेला है।
लेकिन आडवाणी का यह कदम भी उनके सपने को पूरा नहीं करने वाला है। क्योंकि इनकी कुण्डली में प्रधानमंत्री बनने का योग ही नहीं है।
लालू प्रसाद यादव ने एक सभा को संबोधित करते हुए कथा कि आडवाणी की कुण्डली में प्रधानमंत्री बनने का योग ही नहीं है।
लालू की इस बात का समर्थन ज्योतिषशास्त्री भी कर रहे हैं। अमर उजाला से बात करते हुए पण्डित जयगोविंद शास्त्री ने बताया कि आडवाणी की कुण्डली ऐसी नहीं है कि वह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो सकें।
प्रधानमंत्री बनने के लिए पंचम और पंचमेश का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है।
आडवाणी की कुण्डली में पंचमेश गुरू है जो कमजोर स्थिति में है। यह प्रधानमंत्री की कुर्सी और इनके सपनों के बीच बड़ा रोड़ा है।
आडवाणी इन दिनों शनि बुध के बीच राहु की प्रत्यंतर दशा में चल रहे हैं। ग्रहों की यह स्थिति अनुकूल नहीं है।
आडवाणी इन दिनों भ्रमित रहेंगे और ऐसे फैसले लेंगे जो इनकी स्थिति को और कमजोर करेगा। आडवाणी दो से तीन दिनों में अपना इस्तीफा वापस लेंगे।
आडवाणी की कुण्डली में विपरीत राजयोग है। इस योग में व्यक्ति दूसरों के कंधे पर चढ़कर सफलता की ऊंचाईयों को छूता है। इन दिनों इन्हें किसी का कंधा भी नहीं मिलेगा जिससे यह खुद को अलग-थलग पाएंगे।