कुत्ते को धर्म ग्रंथों
के अलावा ज्योतिषशास्त्र में एक महत्वपूर्ण पशु के लिए रूप में बताया गया है। माना
जाता है कि काला कुत्ता जहां होता है वहां नकारात्मक उर्जा नहीं ठहरती है। इसका
कारण यह है कि काले कुत्ते पर एक साथ दो शक्तिशाली ग्रह शनि और केतु के प्रभाव होता
है। काले कुत्ते की तरह कौआ भी शुभ फल देने वाला पक्षी माना जाता है।
जूठन
भोजन और कर्कश स्वर के कारण भले ही इसे निकृष्ट पक्षी कहें लेकिन, शास्त्रों में
कहा गया है कि कौआ ही एक मात्र पक्षी है जिसने अमृत कलश से छलक कर गिरे अमृत का पान
किया था। इसे यम का दूत भी कहा जाता है। यह आसमान के रास्ते यमलोक तक पहुंच जाता है
और पृथ्वी पर रहने वालों की हर ख़बर यमराज तक पहुंचाता है।
शास्त्रों में
कहा गया है कि जिनकी कुण्डली में पितृ दोष होता है उन्हें संतान सुख में बाधा का
सामना करना पड़ता है। कौए को भोजन देने से पितृगण प्रसन्न होते हैं और पितृ बाधा का
प्रभाव कम होता है। शास्त्रों के अनुसार इसका कारण यह है कि पितृ पक्ष में पितरगण
भी कौए के रूप में पृथ्वी पर विचरण करते हैं और अपने वंशजों द्वारा ब्राह्मण भोजन
करवाने के बाद, ब्राह्मणों के जूठे पत्तलों से भोजन करते हैं जिससे उन्हें मुक्ति
मिलती है।
ज्योतिषशास्त्र में पुत्र संतान पर केतु का प्रभाव बताया गया है।
केतु के अशुभ स्थिति में होने पर संतान सुख में बाधा आती है। अगर संतान हो भी जाए
तो उनसे सुख की संभावना नहीं रहती है। लाल किताब में बताया गया है कि संतान सुख में
बाधा आने पर काला कुत्ता अथवा काला और सफेद कुत्ता पालन चाहिए। इससे संतान सुख की
प्राप्ति होती है। यह उपाय संतान के स्वास्थ्य के लिए भी शुभ कारगर होता है।