शास्त्रों में कहा गया है कि बड़ों के चरण स्पर्श करके उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए। विशेष तौर पर जब आप किसी जरूरी काम से कहीं जा रहे हों या कोई नया काम शुरू कर रहे हों। इससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है। दरअसल इसके पीछे अध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक कारण छुपा है।
हमारी मान्यताओं के मुताबिक जब आप किसी का चरण स्पर्श करते हैं तो अहंकार समाप्त होता है और हृदय में समर्पण एवं विनम्रता का भाव जागृत होता है। आपके शरीर की उर्जा चरण स्पर्श करने वाले व्यक्ति में पहुंचती है। श्रेष्ठ व्यक्ति में पहुंचकर उर्जा में मौजूद नकारात्मक तत्व नष्ट हो जाता है। सकारात्मक उर्जा चरण स्पर्श करने वाले व्यक्ति से आशीर्वाद के माध्यम से वापस मिल जाती है। इससे जिन उद्देश्यों को मन में रखकर आप बड़ों को प्रणाम करते हैं उस लक्ष्य को पाने का बल मिलता है।
अध्यात्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि, जब आप किसी का चरण स्पर्श करते हैं तो यह किसी व्यक्ति के लिए नहीं होता है। चरण स्पर्श से आप उस परमात्मा को प्रणाम करते हैं जो व्यक्ति के शरीर में आत्मा के रूप में मौजूद होता है। चरण स्पर्श करते समय हमेशा दोनों हाथों से दोनों पैरों को छूना चाहिए। एक हाथ से पांव छूने के तरीके को शास्त्रों में गलत बताया गया है।
शास्त्रों में चरण स्पर्श के तीन प्रकार बताये गये हैं। झुककर, घुटनों के बल बैठकर और साष्टांग प्रणाम। वैज्ञानिक दृष्टि से झुककर चरण स्पर्श करने से कमर और रीढ़ की हड्डियों को आराम मिलता है। रक्त का प्रवाह सिर की ओर होता है जिससे मानसिक क्षमता और आंखों की रोशनी बढ़ती है।
घुटनों के बल बैठकर चरण स्पर्श करने से जोड़ों में मौजूद तनाव दूर होता है और शरीर लचीला बनता है। जोड़ों में मौजूद तकलीफों से मुक्ति मिलती है। साष्टांग होकर चरण स्पर्श करने से सभी अंग एक्टिव होते हैं और बुद्धि तीक्ष्ण होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि स्त्रियों को साष्टांग होकर किसी का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।
चरण स्पर्श से आयु भी लंबी होती है। इस संदर्भ में एक बहुत ही सुंदर कथा है। ऋषि मार्कण्डेय जी अल्पायु थे। जब इनके पिता को इस बात की जानकारी हुई तो उनका जनेऊ संस्कार कर दिया और चरण स्पर्श की दीक्षा दी। मार्कण्डेय जी के पिता ने कहा कि पुत्र मार्कण्डेय तुम्हें जो भी व्यक्ति दिखे उनका चरण स्पर्श करना। मार्कण्डेय जी ने ऐसा ही करना शुरू कर दिया। एक दिन उनके सामने सप्तऋषि आए।
मार्कण्डेय जी ने झुककर सप्तऋषियों का चरण स्पर्श किया। अनजाने में सप्तऋषियों ने मार्कण्डेय जी को दीर्घायु का आशीर्वाद दे दिया। जब इन्हें पता चला कि मार्कण्डेय जी अल्पायु हैं तो चिंता में पड़ गये। सप्तऋषि बालक मार्कण्डेय को ब्रह्मा जी के पास ले गये। मार्कण्डेय जी ने ब्रह्मा जी का भी चरण स्पर्श किया। ब्रह्मा जी ने भी मार्कण्डेय को दीर्घायु का आशीर्वाद दिया।
सप्तऋषियों ने ब्रह्मा जी से कहा कि यह बालक तो अल्पायु है। अगर कम उम्र में ही इसकी मृत्यु होती है तो हम दोनों का आशीर्वाद झूठा शाबित होगा। सप्तऋषि की बात सुनकर ब्रह्मा जी ने कहा कि अब यह बालक दीर्घायु होगा और कई कल्पों तक जीवित रहेगा। मार्कण्डेय जी के प्राण लेने जब यमराज आये तो भगवान शिव ने यमराज को भगा दिया। बालक मार्कण्डेय ऋषि मार्कण्डेय बनकर कई कल्पों तक जीवित रहे।