कालसर्प योग के विषय में कहा जाता है कि जिनकी कुण्डली में यह योग होता है वह जीवन में कितनी भी उन्नति कर लें उन्हें एक न एक दिन आसमान में ज़मीन पर आना ही पड़ता है।
यह योग बारह प्रकार का होता है और सभी का अलग प्रभाव होता है। इससे प्रभावित व्यक्ति को संतान सुख में बाधा आती है। मानसिक रूप से ये परेशान रहते हैं और जो भी काम शुरू करते हैं उनमें बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस योग के अशुभ प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए ज्योतिषशास्त्र में कालसर्प की शांति का उपाय बताया गया है। इसके लिए सबसे उत्तम दिन है नागपंचमी।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिनकी कुण्डली में कालसर्प योग हैं उन्हें इस दिन कालसर्प योग की शांति करावा लेनी चाहिए। इससे कालसर्प योग का अशुभ प्रभाव कम हो जाएगा। यहां बता दें कि राहु और केतु नाम के दो अशुभ ग्रहों के प्रभाव से कालसर्प योग बनता है इसलिए जब भी राहु और केतु की दशा चलती है इससे प्रभावित लोगों को हर तरफ से समस्यओं का सामना करना पड़ता है। इस योग के दौरान सेहत संबंधी भी कई दिक्कतें आती हैं।
आइए आपको कालसर्प शांति के लिए अपनाए जाने वाले कुछ सामान्य उपाय बताते हैं। आप घर के मुख्य द्वार पर चांदी का पत्तर अथवा स्वास्तिक लगा सकते हैं। इसके अलावा एक पानी वाला नारियल अपने ऊपर से घुमाकर जल में प्रवाहित कर दें। अगर आपके घर में मंदिर है तो उसमें मोर का पंख रखें। साथ ही नाग गायत्री मंत्र 'ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्॥' इस मंत्र का 3, 7, 5 अथवा 11 माला जप करें।