अगर आप इस साल की कुण्डली देंखेंगे तो पाएंगे कि राहु और शनि दो पाप ग्रह एक साथ तुला राशि में बैठें। इसे एक महज संयोग कहें या कुदरत का खेल बीते कुछ समय से जिन स्थितियों का सामना देश और दुनिया को करना पड़ रहा है कुछ ऐसी ही स्थितियों का सामना आज से 21 साल पहले यानी 1991 में देश और दुनिया को करना पड़ा था।
मार्ग 1991 का पंचांग देखने पर ज्ञात होता है कि उन दिनों भी शनि और राहु नाम के दोनों पाप ग्रह एक साथ थे। लेकिन अंतर सिर्फ राशियों का था। उन दिनों दोनों ग्रह शनि की मकर राशि में थे जबकि आज तुला राशि में बैठे हैं।
ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं कि जब ये दोनों ग्रह एक साथ होते हैं तब देश और दुनिया में आर्थिक उतार-चढ़ाव, दुर्घटनाएं और प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिलती है। खास तौर पर भारत के लिए इन दोनों ग्रहों का एक साथ एक घर में बैठना अनुकूल नहीं रहा है।
उन दिनों भी देश को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा था और राजनीतिक उठापटक के दौरा से देश गुजर रहा था। आज भी देश की यही स्थिति है। रूपये अपने खराब दौर से गुजर रहा है और जनता महंगाई से परेशान है।
आपको याद होगा इस साल मई महीने में उत्तरकाशी में बादल फटा था और हजारों लोग काल के गाल में समा गये। 1991 में भी उत्तरकाशी में तबाही आयी थी। उस साल भूकंप के कारण काफी संख्या में लोगों की जान गई थी। बंगलादेश में चक्रवात के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। 21 साल पहले के पंचांग में एक समानता यह भी है कि इस साल गुरूवार उन्हीं तिथि में आ रहा है जिन तिथियों में 1991 में आया था।