चंद्र ग्रहण का प्रभाव
ज्योतिष विज्ञान में चंद्र ग्रह को मन-मस्तिष्क, माता एवं द्रव्य पदार्थों का कारक माना जाता है। अगर चंद्र ग्रहण होता है तो इसका मानव जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। मान्यता के अनुसार, चंद्रमा को ग्रहण के समय अत्याधिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है, जिस कारण वह अशुभ फल देता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहण के दौरान वृष राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
इस अवधि में आपको धन संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं सेहत पर भी इसका विपरीत असर पड़ सकता है। इसलिए ग्रहण की अशुभता से बचने के लिए भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और पीली वस्तुओं का दान करना चाहिए। ऐसा करने से ग्रहण की अशुभता को कम किया जा सकता है।
उपच्छाया चंद्र ग्रहण
उपच्छाया चंद्र ग्रहण उस स्थिति में लगता है जब पृथ्वी की वास्तविक छाया में न आकर उसकी उपच्छाया से ही वापस लौट जाता है। इस स्थिति में चांद पर एक धुंधली सी परत नजर आती है। इस घटना में चांद के आकार पर भी कोई असर नहीं पड़ता है, जबकि वास्तविक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा के आकार में फर्क पड़ता है। इस घटना को नग्न आंखों के द्वारा नहीं देखा जा सकता है। उपच्छाया चंद्र ग्रहण बहुत अधिक प्रभावशाली नहीं होता है। इस दौरान सूतक काल भी मान्य नहीं होता है।
चंद्र ग्रहण की तारीख और समय (Chandra Grahan November 2020 Date and Time)
उपच्छाया से पहला स्पर्श 30 नवंबर 2020 की दोपहर 1 बजकर 04 मिनट पर
परमग्रास चन्द्र ग्रहण 30 नवंबर 2020 की दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर
उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श 30 नवंबर 2020 की शाम 5 बजकर 22 मिनट पर।
यह भारत, अमेरिका, प्रशांत महासागर, एशिया और आस्ट्रेलिया में दिखाई देगा।
ग्रहण 2020 सूतक काल का समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार चंद्र ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा। दरअसल यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण है। इसलिए सूतक काल नहीं माना जाएगा। इस दौरान शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। पूजा-पाठ नहीं होता है। इसलिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिये जाते हैं।