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Chandra Grahan Predictions 2021: चंद्रग्रहण भारत और अमेरिका समेत विश्व के लिए रह सकता है कष्टकारी

Wed, 26 May 2021 06:09 AM IST
विनोद शुक्ला आचार्य राजीव नारायण शर्मा

सार

पूर्ण चंद्र ग्रहण 26 मई को मध्यान्ह 3 बजकर 15 मिनट पर शुरू होगा, इसकी उच्चतम अवस्था शाम 4 बजकर 49 मिनट तक और समाप्ति सायंकाल 6 बजकर 23 पर होगी। यह ग्रहण शनि के अनुराधा नक्षत्र और वृश्चिक राशि में पड़ेगा।
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chandra grahan 2021: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण का विशेष महत्व बताया गया है।
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विस्तार
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  • पूर्ण चंद्र ग्रहण 26 मई को मध्यान्ह 3 बजकर 15 मिनट पर शुरू होगा, इसकी उच्चतम अवस्था शाम 4 बजकर 49 मिनट तक और समाप्ति सायंकाल 6 बजकर 23 पर होगी। यह ग्रहण शनि के अनुराधा नक्षत्र और वृश्चिक राशि में पड़ेगा। ग्रहण के समय ब्रह्माण्ड में कन्या लग्न होगा। यह ग्रहण जल तत्व की राशि वृश्चिक में होने के कारण और इस राशि में उपस्थित केतु, पर सूर्य, राहु, शुक्र की दृष्टि पड़ रही है, इसलिए यह अशुभ योग आने वाले समय में अनेक प्रकार के खतरनाक संकटों का संकेत दे रहा है।
  • इस संवत्सर 2078 का यह प्रथम ग्रहण है। इस वर्ष दिसंबर तक तीन और ग्रहण (2 सूर्य और एक चंद्र ग्रहण) होगा। वृश्चिक वृषभ राशि में की एक्सिस में पड़ेंगे। इस संवत्सर और स्वतंत्र भारत की कुंडली वृषभ लग्न की है और उसमें यह राशियां लग्न यानि सम्पूर्ण देश की अवस्था, लोगों का स्वास्थ्य, मंत्रिमंडल, प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं का संवेदनहीन चरित्र, आंतरिक सुख, किसानों, मजदूरों की अवस्था, कृषि, डॉक्टर, चिकित्सा क्षेत्र, दवाईयां, वैक्सीन, कानून व्यवस्था, रोजगार, व्यापार, नए समझौते, छद्म युद्ध आदि को बताती हैं। 
  • किसी भी कुंडली में लग्न से पूर्व दिशा, चौथे भाव से उत्तर, सातवें भाव से पश्चिम और दसवें भाव से दक्षिण दिशा देखी जाती है। यही कारण है कि ग्रहण और अशुभ ग्रहों के इस योग के कारण भारत की अर्थव्यवस्था, देश की संपूर्ण अवस्था चिंता का विषय बनी रहेंगी है। पूर्व, उ.पूर्व, द.पूर्व, उत्तर, मध्यभारत, दक्षिण, दक्षिण पश्चिम दिशाएं से बीमारी, मृत्यु, जल प्रलह, बाढ़, चक्रवात, तूफान, भूकंप आदि अन्य अशुभ समाचार मिलेंगे हैं।
  • राक्षस नामक संवत्सर 2078 12 अप्रैल 2021 को सुबह 8 बजकर 01 मिनट पर वृषभ लग्न में प्रारम्भ हुआ। जिसका राजा मंगल और मंत्री भी मंगल है, जो राहु केतु से पीड़ित था। लग्नेश शुक्र भी संकट के भाव 12वें में हैं। अतिचारी अष्टमेश गुरु का सत्ता के 10वें भाव में होना, सत्ता के लिए अत्यंत कष्टकारी और परिवर्तन का संकेत देता है। यह ग्रहण अमेरिका के 4 - 10 एक्सिस यानि सत्ता, आंतरिक सुख में पड़ रहा है, अतः वर्तमान सत्ता के लिए अशुभ, बाढ़, चक्रवात, भूकंप, तूफान से बर्बादी का भी संकेत है।
  • विश्व की कुंडली 14.4.21 को प्रातः 02.33 मिनट पर मकर लग्न में प्रारंभ हुई। इसमें लग्नेश शनि 6वें भाव में स्थित मंगल से लग्न में पीड़ित हैं। शनि के नक्षत्र में ग्रहण और लग्नेश मंगल का 8वें भाव में अष्टमेश बुध के साथ होना और शनि का वक्री होना सत्ता, प्रशासन में बैठे महत्वपूर्ण लोगों, मीडिया क्षेत्र, डेटा चोरी आदि अनेक संकटों का संकेत दे रहा है। सामाजिक हिंसा, आंतरिक कलह, मनोरोग, अन्य बीमारी, दवाओं का संकट, दवाओं का बेअसर साबित होना, पेट्रोलियम, खनिज, रसायन पदार्थों में तेजी राजा, प्रजा दोनों को कष्ट देंगी। बाढ़, चक्रवात, तूफान, भूमि स्लखन, भूकंप आदि से जान माल़, कृषि, और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान, बेरोजगारी, भुखमरी, मौसम, बाढ़ आदि का प्रकोप, भूकंप, किसानों, मजदूरों का आंदोलन, उत्तर पूर्व, उत्तर पश्चिम दिशा में पड़ोसी देशों से छद्म युद्ध, हिंसा के खराब संकेत है।
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