लग्न भाव
कुंडली के लग्न भाव यानी प्रथम भाव में अंगारक योग बनना सबसे अधिक खतरनाक है। इस घर में अंगारक योग बनने पर व्यक्ति को पेट संबंधित बीमारियों से जूझना पड़ता है, उसे शारीरिक चोटों का सामना करना पड़ता है। ऐसा व्यक्ति अस्थिर मन वाला और क्रूर हो जाता है।
दूसरा भाव
कुंडली के दूसरे घर में अंगारक योग बनने पर व्यक्ति का जीवन आर्थिक लिहाज से उतार-चढ़ाव वाला हो जाता है।
तीसरा भाव
कुंडली के तीसरे घर में अंगारक योग बनना रिश्ते पर प्रतिकूल असर डालता है। ऐसे व्यक्ति के भाइयों से संबंध कड़वे रहते हैं। यह व्यक्ति धोखेबाजी से सफलता प्राप्त करने की कोशिश करता है। इस भाव में बना हुआ अंगारक योग काफी बार फौज- पुलिस- स्पोर्ट मैन - डॉक्टर बनने के भी अच्छे योग बनता है।
चौथा भाव
चौथे भाव में अंगारक योग बनने पर माता को दुख प्राप्त होता है, ऐसे व्यक्ति को भूमि विवाद भी झेलना पड़ता है। जमीन- जायदाद संबंधित केस- मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है।
पांचवां भाव
कुंडली के पांचवें भाव में अंगारक योग बनने पर संतानहीनता हो सकती है। यह योग जुए सट्टे से लाभ भी दिलाता है।
छठां भाव
कुंडली के छठें भाव में अंगारक योग बनने पर ऋण लेकर किए कार्य में उन्नति होती है। इस योग के कारण कुंडली में शुभ-अशुभ ग्रहों की परिस्थिति के अनुसार व्यक्ति कातिल या सर्जन भी बन सकता है।
सातवां भाव
कुंडली के सप्तम भाव में अंगारक योग बनने पर व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह योग व्यक्ति को नाजायज संबंध वाला, विधवा या विधुर बना सकता है। यह अंगारक दोष दांपत्य जीवन में लड़ाई- झगड़ा- मुकदमे देने वाला होता है।
आठवां भाव
कुंडली के अष्टम भाव में अंगारक योग बनने से व्यक्ति को पैतृक संपत्ति मिलती है लेकिन वह उसे बर्बाद कर देता है और अष्टम भाव का अंगारक दोष लड़ाई- झगड़ा केस- मुकदमे, सड़क दुर्घटना का प्रबल योग बनाता है।
नवम भाव
कुंडली के अष्टम भाव में अंगारक योग व्यक्ति को भाग्यहीन, वहमी, रूढ़ीवादी और तंत्रमंत्र में लिप्त रहने वाला बनाता है। यदि यह अंगारक योग शुभ राशि व शुभ नक्षत्र में बन जाए तो व्यक्ति का भाग्य भी चमका सकता है।
दसवां भाव
कुंडली के दशम भाव में अंगारक योग व्यक्ति को मेहनती, कर्मठ और स्पोर्ट्समैन, फौज, पुलिस सर्जन बना सकता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में अत्यधिक सफल होते हैं।
ग्यारहवां भाव
ऐसे व्यक्ति को प्रॉपर्टी से लाभ मिलता है। हालांकि ग्यारहवें भाव में अंगारक योग जातक को चोर, कपटी और धोखेबाज भी बना सकता है। ऐसा व्यक्ति बेईमान से बहुत धन प्राप्त करता है।
बारहवां भाव
ऐसा व्यक्ति जिसके 12वें भाव में अंगारक योग बनता है, वह आयात-निर्यात में सफल होता है। ऐसे व्यक्ति को रिश्वतखोरी से लाभ मिलता है। ऐसा अंगार योग संपत्ति बर्बाद करा सकता है और चरित्र में भी दोष उत्पन्न कर सकता है।