जो भूमि दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम और वायव्य कोण से ऊंची हो उसे गज पृष्ठभूमि कहते हैं। गज पृष्ठभूमि पर बने मकान में लक्ष्मी का वास होता है तथा धन एवं आयु में निरंतर वृद्धि होती है।
भूमि के मध्य वाले कठोर भाग को पृष्ठ कहते हैं वो पृष्ठ के आधार पर भूखंड के चार प्रकार के भेद बताए गए हैं जो कि इस प्रकार है।
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गज पृष्ठ भूमि
जो भूमि दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम और वायव्य कोण से ऊंची हो उसे गज पृष्ठभूमि कहते हैं। गज पृष्ठभूमि पर बने मकान में लक्ष्मी का वास होता है तथा धन एवं आयु में निरंतर वृद्धि होती है।
कूर्मपृष्ठ भूमि
जो भूमि मध्य भाग में विशेष ऊंची और चारों दिशाओं में नीची हो उसे कूर्मपृष्ठ भूमि कहते हैं। ऐसी भूमि निवास योग्य होती है। जिस पर निवास करने से नित्य उत्साह की वृद्धि होती है और सुख और धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
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दैत्यपृष्ठ भूमि
जो भूमि ईशान, पूर्व और अग्नि कोण में ऊंची और पश्चिम में नीची हो उसे दैत्यपृष्ठ भूमि कहते हैं। दैत्यपृष्ठ भूखंड पर बने मकान में लक्ष्मी नहीं आती है और धन-धान्य और पुत्र की निरंतर हानि होती है।
नागपृष्ठ भूमि
जो भूमि पूर्व और पश्चिम दिशाओं में लंबी तथा दक्षिण और उत्तर दिशा में ऊंची हो उसे नाग पृष्ठभूमि कहते हैं। नाग पृष्ठभूमि पर निवास करने से परिवार के सदस्य मानसिक रूप से ग्रसित होते हैं और घर के मुखिया के शत्रु में वृद्धि होती है। इस भूखंड पर बना मकान पत्नी और बच्चों के लिए अशुभ होता है। इस भूमि पर निवास कभी भी नहीं करना चाहिए।