वर्तमान समय में खेती करने के लिए सिंचाई के पानी की ज्यादा आवश्यकता होती है। कई बार मानसून की बेरुखी, नहरी पानी की कमी और गिरते भूजल स्तर के कारण सिंचाई के पानी की कमी के कारण अक्सर फसल खराब हो जाती है और उत्पादन नगण्य हो जाता है। जिससे किसानों को खेती में घाटा लगता है।
लेकिन गांव मोची वाली के प्रगतिशील किसान राम कुमार ओला ने धान की रोपाई विधि के बजाय वर्तमान वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई सीधी बिजाई विधि अपनाकर 40 प्रतिशत तक पानी की बचत की है तथा धान की बिजाई पर लगने वाले खर्च को बचाया है, उत्पादन भी बढ़ गया। किसान राम कुमार पिछले पांच साल से धान की सीधी बिजाई करके पानी का खर्च तो बचा ही रहा है व अन्य किसानों ने भी राम कुमार का अनुसरण कर सीधी बिजाई में जुट गए हैं।
कृषि विकास अधिकारी डॉ. बहादर राम गोदारा ने बताया कि मोचीवाली के किसान राम कुमार ने परंपरागत रोपाई विधि को दरकिनार कर सीधी बिजाई विधि को अपना रखा है। इसके अलावा कई अन्य किसानों ने भी सीधी बिजाई विधि को अपनाया है। उन्होंने बताया कि सीधी बिजाई से खेत की जुताई का खर्च व डीजल बचेगा। 30 से 40 प्रतिशत पानी की बचत होगी। धान में बकानी रोग भी नहीं लगता।
रोपई विधि के बजाय सीधी बिजाई करने वाली फसल दस दिन पहले पक जाती है। सूखे की स्थिति में 15 जुलाई तक इस विधि से बिजाई कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मक्का एंव गेहूं अनुसंधान केंद्र मेक्सिको क्लाईमेंट चेंज एंड एग्रीकल्चर फूड सिक्योरिटी परियोजना के तहत करनाल स्थित केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान स्थित प्लेटफार्म से धान की सीधी बिजाई करने पर पूरा जोर दिया जा रहा है।