हरियावास गांव के किसान ने आवश्यकता आविष्कार की जननी की कहावत को चरितार्थ करते हुए अपनी बर्बाद होती खेती को खुद के उपाय से बचा लिया। पेस्टी साइड्स के प्रयोग से उसकी जमीन इतनी प्रभावित हो गई थी कि उसके खेत में ग्वार की पैदावार प्रति एकड़ पांच से सात मन तक आ गई थी।
किसान ने जैविक पद्धति को अपनाकर आज उसे फिर से बीस मन प्रति एकड़ तक पहुंचाकर अपनी खेती को बचा लिया है। हरियावास के बिजेन्द्र ने इसके लिए किसी विशेषज्ञ की मदद नहीं ली। उसने जहर को जहर मारता है, बुजुर्गों की इस बात को मन से लगाया तथा उसी पर अपना ध्यान फोकस किया।
किसान ने खेती में स्प्रे के लिए खेत में ही मिलने वाले वाले कड़वी चीजों को एकत्रित किया और उसका घोल तैयार किया। दो बार इसी स्प्रे से जब उसे आशातीत सफलता मिली तो उसने फिर एक बार जैविक खाद की स्प्रे तैयार की। तीसरी बार की स्प्रे से उसकी योजना कामयाब रही और फसल खेत में लहलहाती हुई नजर आई।
किसान के प्रयोग की जब चर्चा चली तो कृषि विशेषज्ञ उसे देखने आए तथा कहा कि वास्तव में उसने अपने खुद के दिमाग से अपनी खत्म होती खेती को बचा लिया है।
जहर को जहर मारेगा की सोच से कड़वी चीजों से तैयार की स्प्रे
किसान बिजेन्द्र हरियावास अपनी खेती को लेकर दिन रात चिंता में रहता था। लेकिन, उसने हिम्मत नहीं हारी और अपना प्रयोग किया। बिजेन्द्र ने बताया कि उसने खेत से ही सारी कड़वी प्रकृति की चीजों को एकत्रित किया। 150 लीटर पानी के ड्रम में नीम, आक, धतूरा, झाड़ी का रांग, अश्वगंधा, तूंबा सहित कुछ अन्य चीजों को दो दो किलो के अनुपात में डाल दिया।
उसे 15 दिन के बाद पानी को निकालकर फिर इन्हीं चीजों को उसी अनुपात में डाल दिया। जब प्रोसेस को महीना पूरा हो गया तब उस घोल में नीम का तेल मिलाया तथा उसे पानी में मिलाकर दस एकड़ भूमि में स्प्रे कर दिया। इस स्प्रे को दो बार करने से फसल में अच्छी ग्रोथ बनी तो फिर जैविक स्प्रे तैयार कर उससे स्प्रे किया।
लॉंग व जांडी के मिश्रण से पूरी की प्रॉटीन की कमी
किसान बिजेन्द्र ने बताया उसने फसल में फैले जहर को तो कड़वी चीजों से खत्म कर दिया लेकिन अब जरूरत फसल को प्रॉटीनयुक्त पदार्थ देने की थी। उसने अपने स्तर पर पता किया तो ज्ञात हुआ कि खेत में ही मिलने वाले लॉंग में 18 प्रतिशत प्रॉटीन होता है। इसलिए लॉंग व जांडी के पत्तों के मिश्रण से घोल तैयार किया और उसे 20 किलो गाय के गोबर व 10 लीटर गोमूत्र में मिलाकर उसे तैयार किया तथा उसकी स्प्रे से फसल को जीवनदान दिया।