चिकित्सा प्रणाली में सुधार के लिए लंबे समय से ‘एक राष्ट्र एक स्वास्थ्य नीति’ की बात की जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी ने यह नारा दिया था। केंद्र की मौजूदा सरकार इसी व्यवस्था पर काम कर रही है। यह बातें रविवार को विश्व आयुर्वेद मिशन की ओर से हिंदुस्तानी एकेडमी के गांधी सभागार में आयोजित जीर्ण एवं असाध्य रोगों का आयुर्वेद उपचार विषयक राष्ट्रीय सेमिनार में कही गईं।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन इलाहाबाद उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी ने दीप जलाकर किया। उन्होंने आयुर्वेद को देश की अमूल्य धरोहर बताया। आयुर्वेद मिशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो.जी एस तोमर ने बताया कि आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता एवं वैश्विक स्वीकार्यता आने वाले समय के लिए शुभ संकेत है।
बतौर विशिष्ट अतिथि अपर मेला अधिकारी महाकुंभ डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने अपने अनुभवों को साझा किया। अध्यक्षता हिंदुस्तानी एकेडमी के सचिव डीपी सिंह ने की। इससे पहले आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. दुर्गा प्रसाद को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड एवं राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय पीलीभीत के प्रवक्ता डॉ. हरिशंकर मिश्र को सर्विस एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया गया।