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अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी पकड़ा फिर भी प्रमोशन नहीं

Wed, 24 Jul 2013 05:33 AM IST
Badaun
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कंधार विमान हाईजैक के आतंकी अहमद उमर सईद शेख को पकड़ा था दरोगा सत्यदेव ने
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चार अपहृत विदेशी मुक्त कराए, बसपा सरकार ने निरस्त की आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की फाइल
कनिष्ठ और दागियों को मिल गया प्रमोशन, आहत हैं मुजरिया एसओ
बदायूं। पुलिस विभाग की हाल ही में जारी इंस्पेक्टर पद की प्रमोशन सूची विसंगतियों का पिटारा साबित हो रही है। यहां गुड वर्क पर गौर न करके मिस कंडक्ट के आधार पर प्रमोशन दिया गया है। यह बात जिले के एक सीनियर एसआई के केस से और पुष्ट हो गई है। मौजूदा वक्त में मुजरिया एसओ के रूप में कार्यरत सत्यदेव यादव ने जान पर खेलकर तीन अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी पकड़े थे। इनमें से एक को छुड़ाने के लिए कंधार में विमान हाईजैक किया गया था। बसपा शासन में लगाई गई पांच मिस कंडक्ट को आधार बनाकर इस जांबाज दरोगा का प्रमोशन रोक दिया गया। एसआई यादव इससे काफी आहत हैं।
कुछ समय पहले तक सिविल लाइंस थाने का प्रभार देख रहे सत्यदेव यादव अब मुजरिया थाने के एसओ हैं। विभाग के प्रति निष्ठा से काम करने वाले सत्यदेव को अब तक कई पुरस्कार और मेडल मिल चुके हैं। इन्होंने सबसे बड़ा कारनामा वर्ष 1994 में मसूरी (गाजियाबाद) एसओ रहते वक्त कर दिखाया। तब तीन दुर्दांत आतंकवादी अहमद उमर सईद शेख (लंदन), अब्दुल रहीम (अफगानिस्तान) और मोहम्मद सईद (हापुड़) ने दिल्ली के कनाट प्लेस से चार विदेशियों बेला जोसफ लूस (अमेरिका), राइस करगेट, क्रस्टोफर माइल क्रेस्टा और पॉल बेंजामिल रेडाउट (सभी इंग्लैंड) का 20 अक्टूबर 1994 को अपहरण कर लिया था। आतंकियों ने इंग्लैंड निवासी तीनों विदेशियों को सहारनपुर में एक गुप्त जगह बंद कर दिया। अमेरिका के निवासी को साथ लेकर मसूरी क्षेत्र में छिपे हुए थे।
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सूचना मिलने के बाद सत्यदेव ने फोर्स के साथ आतंकियों को घेर लिया और विदेशी को सुरक्षित बरामद करने के साथ ही तीनों आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया। फिर उन्होंने सहारनपुर पुलिस की मदद से दूसरी मुठभेड़ करके बाकी तीनों विदेशियों को भी सकुशल निकाल लिया। इस ऑपरेशन में दोनों ओर से हुई कई राउंड फायरिंग में तत्कालीन इंस्पेक्टर साहिबाबाद ध्रुव लाल यादव और एक सिपाही राजेश यादव शहीद हुए थे। साथ ही एसओ सत्यदेव और बाकी टीम मेंबर बाल-बाल बचे थे। तब इनकी बहादुरी की प्रशंसा करते हुए अधिकारियों ने आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की फाइल तैयार की थी। कुछ समय बाद बसपा सरकार आ गई और इस फाइल को निरस्त कर दिया गया।
बसपा सरकार में ही सत्यदेव को वर्ष 2006 से 2008 के बीच पांच मिस कंडक्ट दी गईं। उन्होंने इनके खिलाफ अपील भी की पर सुनवाई न हो सकी। इन्हें उम्मीद थी कि सरकार बदलने पर उनकी बहादुरी का इनाम उन्हें जरूर मिलेगा। वरिष्ठता क्रम में भी वह पीछे नहीं थे। सूबे में पहली बार सूची बनी तो उनका वरिष्ठता क्रमांक 367 था, दूसरी बार में यह 312 हो गया पर सूची जारी हुई तो उसमें उनका कहीं नाम नहीं था। जिले से जुड़े रहे 23 लोगों को एसआई से इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन मिला पर सत्यदेव इससे वंचित रह गए।

डीजीपी को दिया प्रत्यावेदन
प्रमोशन लिस्ट जारी होने के बाद मायूस एसआई सत्यदेव ने लखनऊ जाकर डीजीपी को प्रत्यावेदन दिया है। उन्होंने अपने बेहतर काम का हवाला देते हुए यह भी बताया कि उन्हें अल्प समय में पांच मिस कंडक्ट किसी विद्वेष से दी गईं। उन्होंने डीजीपी से प्रमोशन लिस्ट में नाम शामिल कराने की मांग की है। सत्यदेव को डीजीपी ने जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है।
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प्रमोशन लिस्ट में विसंगति के कुछ नमूने
1. वरिष्ठता क्रम संख्या- 36, अशोक कुमार त्रिपाठी (फिलहाल तैनाती बनारस) विशेष: 13 मिस कंडक्ट, फिर भी प्रमोशन।
2. वरिष्ठता क्रम संख्या- 59, राममूर्ति सिंह (आगरा) विशेष: 11 मिस कंडक्ट
3. वरिष्ठता क्रम संख्या- 19, वीरेंद्र सिंह बालियान (मेरठ) विशेष: 10 मिस कंडक्ट
4. वरिष्ठता क्रम संख्या- 20, मदनमोहन (लखनऊ) विशेष: 9 मिंस कंडक्ट, वर्ष 2007 में आईपीएस अफसर ने संदिग्ध की सत्यनिष्ठा, फिर भी सूची में शामिल
5. वरिष्ठता क्रम संख्या- 1397, ओमप्रकाश चौबे (गोरखपुर) विशेष: पांच मिस कंडक्ट, 13 दिसंबर 2012 को आईपीएस अधिकारी ने लिखा कि भविष्य में प्रमोशन न दिया जाए।
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