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लगातार बीमार हो रही जिले की मिट्टी

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Badaun
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सिटी रिपोर्टर
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बदायूं। जिले की मिट्टी लगातार बीमार होती जा रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार मिट्टी में जीवांश कार्बन और फास्फोरस की कमी अधिक मिली है। इसका खुलासा मृदा प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान हुआ है। इतना कुछ होने के बाद भी कृषि विभाग के अफसरों की नींद नहीं टूट रही।
अपनी मिट्टी पहचानो अभियान रबी, खरीफ और जायद की फसलों में चलाया जाता है। अधिकारी और कर्मचारियों को मिट्टी नमूने इकट्ठे करने को लक्ष्य दिए जाते हैं। रबी सीजन में इस बार आठ अक्तूबर को चलाए गए अभियान में जिला मुख्यालय स्थित प्रयोगशाला में 3341, 20 अक्तूबर को 2028 और तीन नवंबर को 2012 मिट्टी के नमूने जांच को आए। इनमें लगभग पांच हजार नमूनों की जांच की गई तो अधिकांश में जीवांश कार्बन कम मिले। मिट्टी में इसका प्रतिशत .8 होना चाहिए, लेकिन .4 तक ही है। इसी तरह फास्फेट भी मात्रा भी इतने ही प्रतिशत मिली।
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मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के तकनीकी सहायक नत्थूलाल गंगवार ने बताया कि जीवांश कार्बन और फास्फेट मिट्टी में कम मिले हैं। ये चिंता की बात है। इसकी पूर्ति के लिए किसान कंपोस्ट, गोबर खाद, हरी खाद का प्रयोग करें। यदि इसकी पूर्ति नहीं की तो फसल के पत्ते पीले पड़ने लग जाते हैं। फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। पैदावार सही नहीं हो पाती।

टारगेट नहीं हुआ पूरा
अभियान के तहत जो नमूने प्रयोगशाला को मिले थे उनमें लगभग दो हजार की जांच अभी तक पूर्ण नहीं हो पाई, जबकि गेहूं की बुवाई शुरु हो गई है। ये किसान बिना मृदा स्वास्थ्य कार्ड देखे ही फसल की बुवाई कर रहे हैं।
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अभियान के आखिरी चरण में आए मिट्टी नमूनों की जांच के लिए अभी समय शेष है। वह शीघ्र जांचें जाएंगे। जीवांश कार्बन आदि की पूर्ति के लिए किसानों को वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए योजना आई है।
-अनिल कुमार तिवारी, उप कृषि निदेशक, प्रसार
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