फैजगंज बेहटा। पुलिस-प्रशासन की बंदिशों पर परंपरा का जुनून हावी दिखा। जमदिया वाले दिन प्रशासन ने इलाके में पत्थरमार दिवाली रोककर अपनी पीठ थपथपा ली, लेकिन दूसरे दिन दिवाली पर यहां जमकर ईंट-पत्थर चले। इस खेल में छह लोग घायल हो गए। इन्हें रोकने गए एक दरोगा और दो सिपाहियों को भी भीड़ ने दौड़ा दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
फैजगंज और बेहटा के लोगों के बीच पत्थरमार दिवाली की परंपरा कई दशक पुरानी है। हमेशा यह परंपरा जमदिया वाले दिन मनाई जाती है, लेकिन इस बार प्रशासन ने यह परंपरा रोकने का मन बना लिया और जमदिया वाले दिन यहां एसडीएम बिसौली रामअरज यादव समेत कई थानों की पुलिस ने गांव में रूटमार्च निकाला। इसके अलावा गांव के संभ्रांत लोगों को समझाकर यह परंपरा न निभाने की बात कही। इसके बाद भी कुछ शरारती युवकों ने यह प्रथा निभाने की कोशिश की, इस पर पुलिस ने उन्हें दौड़ा दिया।
जमदिया वाले दिन तो लोग मान गए लेकिन, दिवाली की दोपहर दोनों गांवों के लोग ईंट-पत्थर लेकर आमने-सामने आ गए और जमकर पथराव हुआ। इसका विरोध करने पहुंचे दरोगा वीके त्यागी, कांस्टेबिल मोनू और शिवकुमार पर भी भीड़ ने पत्थर फेंके और उन्हें दौड़ा दिया।
बाद में हाइवे के दोनों ओर से शाम तक पथराव होता रहा। इसमें फैजगंज के जगदीश, खुशी मोहम्मद, राजराम, विश्नू कुमार घायल हो गए। जबकि बेहटा गांव निवासी अफसर अली और तेजपाल को चोट लगी। सभी घायलों ने निजी अस्पताल में इलाज कराया और अपने घरों को लौट गए। शाम को दोनों गांवों के लोग एक-दूसरे केघर पहुंचे और दिवाली की बधाई दी। इस बीच गांव वालों ने घायलों का हाल भी जाना।
नष्ट हुई सरसों की फसल
इस अनूठी परंपरा निभाने के दौरान गांव निवासी मुकेश कुमार और शिशुपाल के खेतों में खड़ी एक एकड़ सरसों की फसल नष्ट हो गई। हालांकि किसी ने इस पूरे मामले में पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी है।
एसडीएम रामअरज यादव ने बताया कि ऐसा मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि गांव वालों ने ऐसा किया है और कुछ लोग घायल हुए हैं तो जांच केबाद उनके खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की जाएगी।