आसफपुर। कई दशक से चली आ रही पत्थरमार दिवाली की परंपरा इस साल पुलिस की सख्ती के चलते नहीं मनाई जा सकी। पथराव के लिए दोनों गांवों के लोग ईंट-पत्थर लेकर आमने-सामने आए लेकिन वहां पहले से मौजूद पुलिस ने उन्हें वहां से दौड़ा दिया। इस दौरान पुलिस ने रूटमार्च निकाला।
जिक्र कर दें कि गांव फैजगंज और बेहटा के बाशिंदे हर साल जमदिया वाले दिन पत्थर मार दिवाली खेलते हैं। इसके तहत दोनों गांवों के लोग मलबा लेकर खेत में इकट्ठे होते हैं और जमकर पथराव होता है। खास बात यह है कि इस अनूठे संघर्ष में घायल होने वाला कोई व्यक्ति पुलिस से शिकायत नहीं करता। वहीं यह परंपरा हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोग शामिल होते हैं।
प्रशासन को इस परंपरा की पहले से खबर थी। इसकेचलते सोमवार की सुबह से ही फैजगंज समेत आसपास थानों की पुलिस वहां मुस्तैद हो गई। इसके अलावा एसडीएम गुलाब चंद्र भी सुबह से ही वहां डेरा जमा लिए। अधिकारियों ने गांव वालों को ऐसा न करने के लिए समझाया। भीड़ नहीं मानी तो मुचलका पाबंद करने की हिदायत भी दी। बावजूद इसके कुछ लोगों ने यह परंपरा निभाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें दौड़ा दिया। हालात बिगड़ने से पहले पुलिस ने इलाके में रूटमार्च भी निकाला। एसओ गंगा सिंह यादव ने बताया कि गांव के संभ्रांत लोगों के सहयोग से इस बार यह अनूठी परंपरा रुकवा दी गई है।