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Gold: विश्व ने शुरू की डॉलर के विकल्प की तलाश, इस साल की तिमाही में 176 प्रतिशत बढ़ी सोने की खरीदी

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, लंदन Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 01 Jun 2023 05:51 PM IST
सार

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने हाल में प्रमुख देशों के सेंट्रल बैंकों के बीच एक सर्वे किया। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 62 फीसदी सेंट्रल बैंकों को अगले पांच साल में उनके भंडार में सोने की मात्रा बढ़ने की आशा है। एक साल पहले भी किए गए सर्वे में 46 प्रतिशत सेंट्रल बैंकों ने अपने भंडार में सोने की मात्रा बढ़ने की उम्मीद जताई थी।

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Gold Ornaments With Girl - फोटो : iStock

विस्तार
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दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों में सोना खरीदने की होड़ बढ़ती जा रही है। विश्व वित्तीय बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच विभिन्न सेंट्रल बैंक सोने में निवेश को अधिक सुरक्षित मान रहे हैं। मौद्रिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह अमेरिकी डॉलर में लगातार घट रहे भरोसे का भी संकेत है। दुनिया में इस समय ट्रेंड अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर का विकल्प ढूंढने का है। इस परिघटना को डी-डॉलराइजेशन के नाम से जाना जा रहा है। 

सोने का भंडार भरने का भी भरोसा
दुनिया भर में सोने के कारोबार का लेखा-जोखा रखने वाली संस्था वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने हाल में प्रमुख देशों के सेंट्रल बैंकों के बीच एक सर्वे किया। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 62 फीसदी सेंट्रल बैंकों को अगले पांच साल में उनके भंडार में सोने की मात्रा बढ़ने की आशा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने ऐसा ही सर्वे एक साल पहले भी किया था। तब 46 प्रतिशत सेंट्रल बैंकों ने अपने भंडार में सोने की मात्रा बढ़ने की उम्मीद जताई थी। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 50 प्रतिशत सेंट्रल बैंकों को तो यह उम्मीद है कि अगले पांच साल में उनके विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। जबकि हाल के दशकों में सेंट्रल बैंकों में चलन अपने भंडार में 15 प्रतिशत तक सोना रखने का रहा है। हाल तक ज्यादातर बैंक अपने भंडार में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में डॉलर रखना पसंद करते थे। 

डॉलर के विकल्प की तलाश शुरू 
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका में ब्याज की बढ़ी दरों, मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं और भू-राजनीति खतरों की वजह से अपने भंडार में सोने की मात्रा बढ़ाने का फैसला विवेकपूर्ण है। इन कारणों से प्रेरित होकर सेंट्रल बैंकों के अधिकारी फैसले ले रहे हैं। खास कर यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से सेंट्रल बैंकों ने गोल्ड की खरीद बढ़ा दी है। यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को देखते हुए पश्चिमी देशों ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाए। उसे अंतरराष्ट्रीय भुगतान के सिस्टम स्विफ्ट से बाहर कर दिया गया। इसके साथ ही अमेरिका ने वहां के बैंकों में रखी गई रूस की 300 बिलियन डॉलर की रकम को जब्त कर लिया। इससे दुनिया भर में डॉलर में अपना पैसा लगाने को लेकर भय फैल गया और विभिन्न देशों ने निवेश के लिए डॉलर के विकल्प की तलाश शुरू कर दी। इस सिलसिले में सोने को अपने भंडार में रखना उन्हें सबसे सुरक्षित विकल्प नजर आ रहा है।

176 प्रतिशत अधिक सोना खरीदा
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में जारी बैंकिंग संकट, अमेरिका सरकार पर बढ़ते कर्ज की मात्रा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी का शिकार होने की आशंकाओं के कारण भी विभिन्न देशों में डॉलर के प्रति अविश्वास बढ़ा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कहा है कि सोने को खरीदने का पिछले साल शुरू हुआ ट्रेंड इस साल भी जारी है। इस साल के पहले तीन महीनों में सेंट्रल बैंकों ने साल भर पहले की इसी अवधि की तुलना में 176 प्रतिशत अधिक सोना खरीदा। यह रुझान विकसित देशों में कम, लेकिन उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में ज्यादा दिखा है।

 

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