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Pakistan: प्रांतों की सत्ता क्यों छोड़ना चाहते हैं इमरान खान, क्या पाकिस्तान में फिर कुछ बड़ा होने वाला है?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sun, 27 Nov 2022 05:21 PM IST
सार

अचानक इमरान के इस फैसले ने सभी को चाचैंका दिया है। सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इमरान ने ऐसा एलान क्यों किया? वह भी तब जब हाल ही में हुए उपचुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी जीत मिली थी। क्या फिर से पाकिस्तान में कुछ बड़ा होने वाला है? आइए समझते हैं... 
 

इमरान खान
इमरान खान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पाकिस्तान में सियासी संकट कम होते नहीं दिख रहा है। आजादी मार्च के बाद अब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ  (पीटीआई) पार्टी के चेयरमैन इमरान खान ने नया एलान किया है। उन्होंने कहा है कि अब उनकी पार्टी के सभी सदस्य प्रांत की असेंबली से भी इस्तीफा दे देंगे। मतलब इमरान की पार्टी अब राज्यों की सत्ता भी छोड़ देगी। अभी खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांत में इमरान खान के पार्टी की सरकार है।


अचानक इमरान के इस फैसले ने सभी को चाचैंका दिया है। सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इमरान ने ऐसा एलान क्यों किया? वह भी तब जब हाल ही में हुए उपचुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी जीत मिली थी। क्या फिर से पाकिस्तान में कुछ बड़ा होने वाला है? आइए समझते हैं... 

 

पहले जानिए इमरान खान ने क्या बोला?
शनिवार को इमरान खान ने एक रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, 'मौजूदा समय में पूरी व्यवस्था भ्रष्ट हो चुकी है। हम इस प्रणाली का हिस्सा नहीं होंगे। हमने सभी विधानसभाओं को छोड़ने और इस भ्रष्ट व्यवस्था से बाहर निकलने का फैसला किया है। इस संबंध में मैं जल्द ही संसदीय समूहों के साथ बैठक करूंगा और अपने मुख्यमंत्रियों से परामर्श करूंगा।' इमरान ने आगे कहा कि दोनों प्रांतों के मुख्यमंत्रियों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जबकि इस संबंध में अंतिम निर्णय पीटीआई के संसदीय दल की बैठक के बाद किया जाएगा। 

उन्होंने अपने भाषण में कहा, 'हम अपने ही देश में तोड़-फोड़ करें और तबाही मचाएं, उससे बेहतर है कि हम इस भ्रष्ट व्यवस्था से बाहर निकलें और इस सिस्टम का हिस्सा ना बनें, जिधर यह चोर बैठकर हर दिन अपने अरबों रुपए के केस माफ करवा रहे हैं। अब हम इस्लामाबाद का रुख नहीं करेंगे क्योंकि जब लाखों लोग इस्लामाबाद जाएंगे तो कोई नहीं रोक सकता लेकिन मुझे पता है कि इससे तबाही मचेगी।'
 

आखिर कौन सी चाल चल रहे हैं इमरान खान? 
हमने इसे समझने के लिए पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नदीम अली से बात की। उन्होंने कहा, 'सत्ता से बेदखली और कोर्ट के फैसले के बाद से इमरान खान परेशान हैं। उनके सामने कोई नया रास्ता नहीं दिख रहा है। यही कारण है कि उन्होंने अपना आखिरी दांव भी चल दिया है। इसके जरिए वह खैबर पख्तूनख्वाह और पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता लाने की कोशिश कर रहे हैं। वह सोचते हैं कि इससे सरकार पर दबाव बनेगा।'

नदीम के अनुसार, धरना-प्रदर्शन और आजादी मार्च को जारी रखने के लिए इमरान को काफी पैसों की जरूरत पड़ेगी। सत्ता से बेदखली के बाद से उनकी पार्टी पर लगातार शिकंजा कस रहा है। इसके अलावा कई बड़ी रैलियों को भी वह आयोजित करवा चुके हैं। ऐसे में अब उनकी पार्टी आर्थिक तंगी का सामना भी करने लगी है। यही कारण है कि अब इमरान नए तरीके से राजनीतिक दांव चल रहे हैं। वह प्रांतों की सत्ता से बाहर होकर मीडिया और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाएंगे। 

वहीं, रावलपिंडी के एक प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार फरजाना शेख कहते हैं कि भले ही लोगों में इमरान खान के प्रति एक तरह की संवेदना है, लेकिन इसके बावजूद वह एक के बाद एक लगातार कई गलतियां कर रहे हैं। हाथ से सत्ता जाने के बाद से कई बार इमरान की पार्टी के आयोजनों के चलते बवाल हो चुका है। तोड़फोड़, आगजनी जैसी घटनाएं सामने आ चुकी है। अगर ज्यादा दिन तक वह ऐसा करते तो आम लोगों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा। इसके चलते उनके खिलाफ भी लोग खड़े होने लगते या यूं कहें कि जो अभी उनके साथ थे वही उनके खिलाफ खड़े हो जाते। यही कारण है कि अब वह नए तरह से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में जुटे हैं।   

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक महमूद अली कहते हैं कि इमरान खान की तरफ से उठाया गया यह पहला गंभीर कदम है। इस फैसले से इमरान यह बताना चाह रहे हैं कि उन्होंने सिस्टम के साथ समझौता करने से इनकार कर दिया है। 
 

दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री क्या करेंगे? 
फरजाना शेख आगे कहते हैं कि जरूरी नहीं कि इमरान खान के कहने पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री पद छोड़ दें। दोनों असेंबली के सदस्य भी पद छोड़ें ऐसा मुश्किल ही लगता है। इसलिए इमरान खान का ये दांव उल्टा भी पड़ सकता है। खैबर पख्तूनख्वाह में पिछले नौ साल से पीटीआई की सरकार है और महमूद खान 2018 में मुख्यमंत्री बने थे। खैबर पख्तूनख्वाह में बहुत सारे ऐसे विधायक हैं जो विधानसभा में बने रहना चाहते हैं। इसी तरह पंजाब में इमरान खान की पीटीआई गठबंधन के साथ सरकार में है। ऐसे में गठबंधन की अन्य पार्टियां इमरान की बात माने, ऐसी संभावना कम ही है।
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