बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

अमेरिकी सैनिकों ने माना: हम अफगानिस्तान में हारे, मकसद नहीं हुआ पूरा

न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन/काबुल। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 22 Jul 2021 05:36 AM IST

सार

  • अमेरिकी मरीन रेडर का हिस्सा रहे जेसन लाइली ने जंग में बहाए लहू पर जताया अफसोस
  • रेडर ने कहा, हम यह युद्ध हार गए, सौ फीसदी। मकसद तो तालिबान का सफाया था और वो हमने हासिल ही नहीं किया
विज्ञापन
US Army
US Army - फोटो : Social Media
ख़बर सुनें

विस्तार

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना अपने देश लौटना शुरू हो चुकी है। ऐसे मे उनकी स्वदेश वापसी पर कई लोग पूछ रहे हैं कि अफगानों के साथ 20 साल चले इस युद्ध में आखिर हासिल क्या हुआ? इस पर बहुत से सैनिक मानते हैं कि अमेरिका यह युद्ध हार गया है। अमेरिकी सैनिक जेसन लाइली ने देश के सबसे लंबे युद्ध में बहाए गए धन और लहू पर अफसोस जताया।
विज्ञापन


जेसन लाइली (41) अमेरिका के मरीन रेडर नाम के विशेष बल  का हिस्सा थे और उन्होंने इराक व अफगानिस्तान में कई अभियानों में हिस्सा लिया है। लाइली जब राष्ट्रपति जो बाइडन के अफगानिस्तान से सेनाएं वापस बुलाने के फैसले के बारे में सोचते हैं तो जितना उन्हें अपने देश पर प्यार आता है, उतनी ही राजनेताओं के प्रति वितृष्णा भी नजर आती है। वे कहते हैं कि उन्होंने जो साथी इस युद्ध में खोए हैं, वे बेशकीमती थे।


उन्होंने कहा, हम यह युद्ध हार गए, सौ फीसदी। मकसद तो तालिबान का सफाया था और वो हमने हासिल ही नहीं किया। तालिबान फिर से देश कब्जा लेगा। 34 वर्षीय जॉर्डन लेयेर्ड ने कहा, उनके साथी इराक और अफगानिस्तान कभी न जीतने वाला वियतनाम मानते हैं। लाइली और लेयेर्ड के अलावा और भी कई सैनिक इसी तरह की सोच रखते हैं।

साम्राज्यों की कब्रगाह
16 साल तक अमेरिका के आतंक के खिलाफ युद्ध में मोर्चे पर तैनात रहे जेसन लाइली पूछते हैं कि क्या यह युद्ध जरूरी था? मैंने सोचा था कि दुश्मन को हराया जाएगा और अफगानिस्तान को पूर्ण रूप से ऊपर उठाया जा सकेगा। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसके लिए दोनों तरफ से एक भी जान जानी चाहिए थी। मैंने यहां तैनाती के दौरान जाना कि क्यों इस जगह को इतिहासकार साम्राज्यों की कब्रगाह मानते हैं। 19वीं सदी में ब्रिटेन ने दो बार अफगानिस्तान पर हमला किया और 1842 में सबसे बुरी हार झेली। सोवियत संघ ने 1979 से 1989 तक अफगानिस्तान में जंग लड़ी और 15 हजार लाशें व हजारों घायल सैनिक लेकर लौटा।

राष्ट्रपति गनी बोले- शांति के इरादे में नहीं तालिबान
तालिबान और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों के हमले झेल रहे अफगानिस्तान में हालात जल्दी संभलते नहीं दिख रहे हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने ईद के मौके पर दिए अपने भाषण में कुछ ऐसा ही संकेत दिया। उन्होंने ईद से एक दिन पहले राष्ट्रपति भवन के पास तीन रॉकेट दागे जाने की निंदा करते हुए कहा कि तालिबान शांति प्रक्रिया का हिस्सा बनने के मूड में नहीं है। गनी ने कहा, अब्दुल्ला ने कुछ समय पहले ही मुझे बताया है कि तालिबान की इच्छा शांति की नहीं है। हमें आगे की तैयारी करनी होगी। हम अपनी मिट्टी और सम्मान की रक्षा के लिए हम आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।

अब अफगान ही तैयार करेंगे नया अफगानिस्तान
अशरफ गनी ने कहा कि खासतौर पर बीते तीन महीनों में हमारे सुरक्षा बलों ने बड़ा बलिदान दिया है। हमने बहुत से लोगों को खोया है। उन्होंने ईद के मौके पर कहा कि अफगानिस्तान का भविष्य अब अफगानों की ओर से तय किया जाएगा। तालिबान पर हमला बोलते हुए गनी ने कहा कि हमारी ओेर से बीते कुछ दिनों में उनके 5,000 कैदियों को जेल से रिहा किया गया है। इसके बाद भी वे वार्ता को तैयार नहीं हैं।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us