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Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप के घर से FBI को मिले 'टॉप सीक्रेट' दस्तावेज, बढ़ेगी मुसीबत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 13 Aug 2022 02:39 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने गुप्त दस्तावेजों को अपने आवास में रखकर जासूसी अधिनियम का उल्लंघन किया है। एफबीआई एजेंटों ने संघीय मजिस्ट्रेट न्यायाधीश द्वारा अनुमोदित वारंट के आधार पर ट्रंप के आवास की तलाशी ली थी।

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI
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विस्तार

अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घर से फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) ने कुछ 'टॉप सीक्रेट' सरकारी दस्तावेज बरामद किए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को बताया कि एफबीआई एजेंटों ने इस हफ्ते फ्लोरिडा में ट्रंप के घर की तलाशी ली थी, जिसमें कुछ गोपनीय दस्तावेजों को जब्त किया गया। यह दस्तावेज परमाणु हथियारों से जुड़े हुए थे। अब इस खुलासे से आने वाले समय में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। 



ट्रंप ने किया कानून का उल्लंघन
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने गुप्त दस्तावेजों को अपने आवास में रखकर जासूसी अधिनियम का उल्लंघन किया है। एफबीआई एजेंटों ने संघीय मजिस्ट्रेट द्वारा अनुमोदित वारंट के आधार पर ट्रंप के आवास की तलाशी ली थी। इसके चार दिन बाद एजेंसी ने जारी किए गए बयान में कानूनी दस्तावेजों को लेकर कई हैरान कर देने वाले खुलासे किए हैं।


ट्रंप की बढ़ सकती हैं मुसीबतें
जांच अधिकारियों ने अपने वारंट आवेदन में अमेरिकी मजिस्ट्रेट न्यायाधीश ब्रूस रेनहार्ट को बताया कि यह मानने का संभावित कारण था कि ट्रंप ने जासूसी अधिनियम का उल्लंघन किया है। वहीं ट्रंप के पास टॉप सीक्रेट लेवल वाले दस्तावेजों के खुलासे से उनके लिए बड़ा कानूनी खतरा पैदा हो सकता है।

कम से कम पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है
आगे अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि जो दस्तावेज आमतौर पर विशेष सरकारी सुविधाओं में सुरक्षित रहने चाहिए थे, वो ट्रंप के पास कैसे थे? साथ ही बताया कि इस तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर नुकसान हो सकता था। वहीं ट्रंप अगर इस मामले में दोषी पाए जाते हैं तो उनको कम से कम पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

दस्तावेज गलत हाथों में पड़ सकते थे
पिछले दिनों अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने परमाणु हथियारों से संबंधित दस्तावेजों की तलाशी के लिए पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित आवास पर छापेमारी की थी। उन पर आरोप है कि ट्रंप ने अपनी सरकार जाने के बाद दस्तावेजों को नई सरकार को नहीं सौंपा था। सरकारी अधिकारी इस बात को लेकर चिंता में हैं कि यह दस्तावेज ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर पर गलत हाथों में पड़ सकते थे। अधिकारियों के मुताबिक इन दस्तावेजों का संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है।

ट्रंप ने अपने रिसोर्ट में छिपाई एटमी हथियारों की जानकारी
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा में मार-ए-लागो एस्टेट में पड़े छापों के संबंध में कहा जा रहा है कि सत्ता छोड़ने के बाद देश के परमाणु हथियारों से संबंधित जानकारी वह अपने साथ ले गए थे। इसे उन्होंने अपने आवास में छिपा दिया। नियम के मुताबिक, यह जानकारी केवल सरकार के पास हो सकती है। एफबीआई के छापों में उन्हीं कागजात को तलाशने का प्रयास किया जा रहा था। अमेरिका का कोई बड़ा अधिकारी परमाणु दस्तावेज के संबंध में आधिकारिक रूप से बोलने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन वाशिंगटन टाइम्स अखबार ने जांच से जुड़े जानकार सूत्रों के हवाले से यह सूचना प्रकाशित की है।

अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा मुकदमों का सामना करने वाले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगे थे कि चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने सत्ता अपने पास रखने की कोशिश की। जब उन्होंने व्हाइट हाउस छोड़ा तो सरकार से संबंधित गोपनीय जानकारी अपने साथ ले गए। इसे उन्होंने मार-ए-लागो में रिसोर्ट पर छिपाकर रखा। यह कागजात वहां असुरक्षित थे और किसी भी देश की एजेंसियां इन तक पहुंच सकती थीं। अब ट्रंप पर गोपनीय जानकारी छिपाने और देश के खिलाफ जासूसी का मुकदमा चलाए जाने की संभावना है।

समर्थकों का आरोप, चुनाव लड़ने से रोकना चाहते हैं विरोधी
इन छापों के संबंध में पूर्व राष्ट्रपति के समर्थकों का कहना है कि ट्रंप 2024 में फिर से राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दावेदारी करेंगे। विरोधी उन्हें इससे रोकना चाहते हैं। उनके रिसोर्ट पर छापे और वहां से कथित तौर पर गोपनीय कागजात की बरामदगी विरोधियों का उन्हें चुनाव में उतरने से रोकने के लिए रचा गया षड्यंत्र है। इसे लेकर रिपब्लिकन पार्टी के असरदार सदस्यों ने जांच एजेंसियों और न्याय विभाग पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

अटार्नी जनरल ने व्यक्तिगत रूप से दी थी तलाशी की मंजूरी
अमेरिका के अटार्नी जनरल मैरिक गारलैंड ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस तलाशी के संबंध में वारंट लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से मंजूरी दी थी। उन्हें गोपनीय कागजात छिपाए जाने का यकीन था। उन्होंने एफबीआई के एजेंटों और न्याय विभाग के अधिकारियों को किसी से भी भयभीत हुए बिना काम करने को कहा।

ट्रंप ने पूछा, वकील को मौजूद रहने की क्यों नहीं दी अनुमति
तमाम विवादों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट लिखकर पूछा है कि अधिकारियों ने छापों के दौरान हमारे वकील या अन्य समर्थकों को मौजूद रहने की इजाजत क्यों नहीं दी। उन्हें घर से दूर हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने जो कुछ किया, उसमें उनके अलावा कोई भी शामिल नहीं था। परमाणु हथियारों से जुड़े कागजात का मुद्दा महज एक छलावा है। ऐसा तो नहीं, एजेंसी उन्हें बदनाम करने के लिए किसी के इशारे पर अपने पास से दस्तावेज वहां छिपा रही थी और बाद में उनकी बरामदगी दिखा दी। उन्होंने सरकार से छलावा बंद करने के लिए कहा।
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