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पाकिस्तान: अफगानिस्तान के पत्रकार ने भारत के मुद्दे पर विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की जमकर धुलाई की

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: देव कश्यप Updated Mon, 21 Jun 2021 07:33 AM IST

सार

अपने बड़बोलेपन के लिए मशहूर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अफगानिस्तान के टोलो न्यूज के प्रमुख लोतफुल्लाह नजफिजादा को साक्षात्कार दिया। जिसमें वो तालिबान का बचाव करते दिखे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत को लेकर काफी कुछ कहा है। इन सभी मुद्दों पर उनकी जमकर खिंचाई हुई।

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शाह महमूद कुरैशी (फाइल फोटो)
शाह महमूद कुरैशी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार

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अफगानिस्तान के न्यूज चैनल टोलो न्यूज को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का दिया साक्षात्कार काफी चर्चा में है। इस साक्षात्कार की वजह से उनकी चारों तरफ आचोलचना हो रही है साथ ही उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। यह साक्षात्कार टोलो न्यूज के प्रमुख लोतफुल्लाह नजफिजादा ने लिया है।

टोलो न्यूज ने इसके कई वीडियो क्लिप ट्विटर पर शेयर किए हैं। कई सवालों के जवाब में पाकिस्तानी विदेश मंत्री फंसते दिखे। इस साक्षात्कार में क़ुरैशी ने अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए।

टोलो न्यूज ने कुरैशी से पूछा कि अफगानिस्तान में भारत के कितने काउंसलेट हैं? इस पर कुरैशी ने कहा, 'आधिकारिक रूप से तो चार हैं लेकिन अनाधिकारिक रूप से कितने हैं, ये आप बाताएंगे। मुझे लगता है कि अफगानिस्तान की सरहद भारत से नहीं मिलती है। जाहिर है कि अफगानिस्तान का भारत से एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में संबंध है।'

'दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध हैं। ये आपका अधिकार है कि भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध रखें। दोनों देशों के बीच कारोबार भी है और इसमें हमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन मुझे लगता है कि अफगानिस्तान में भारत की मौजदूगी जितनी होनी चाहिए उससे ज्यादा है क्योंकि दोनों देशों के बीच कोई सीमा भी नहीं लगती है।'

लोतफुल्लाह ने पूछा कि क्या आपको भारत की मौजूदगी परेशान करती है? इस पर कुरैशी ने कहा कि अगर अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ होगा तो दिक्कत वाली बात है। टोलो न्यूज ने पूछा कि क्या भारत ने ऐसा किया है तो कुरैशी हंसने लगे।

सवालों में फंसे पाकिस्तानी विदेश मंत्री
लोतफुल्लाह के एक सवाल पर कुरैशी असहज दिखे। लोतफुल्लाह ने पूछा कि क्या तालिबान नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा, मुल्ला याकूब या सिराजुद्दीन हक्कानी पाकिस्तान में नहीं हैं? इस पर क़ुरैशी ने कहा, 'आप अपनी सरकार से पूछिए। आप आरोप लगाना जारी रखें।'

कुरैशी को बीच में टोकते हुए लोतफुल्लाह ने कहा, 'पिछले महीने तालिबान नेता शेख अब्दुल हकीम अफगानिस्तान में, अपने नेताओं से बात करने आए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे पाकिस्तान से आए हैं।'

इस पर कुरैशी ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने संपर्क नहीं किया था, इसलिए उनको पता नहीं है। कुरैशी ने कहा कि तालिबान भी अफगानिस्तान में शांति चाहता है। इस पर लोतफुल्लाह ने पूछा कि आपको कैसे पता है कि तालिबान शांति चाहता है?

कुरैशी ने कहा कि उनसे बात होती रही है, 'मैं तालिबान और अफगान सरकार की वार्ता में शामिल नहीं हो सकता।'

इस पर लोतफुल्लाह ने कहा कि ऐसी कोई वार्ता हुई ही नहीं है। कुरैशी इस पर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए और कहा कि अफगानिस्तान फिर से एक और गृह युद्ध नहीं झेल सकता है।

लोतफुल्लाह ने पूछा कि क्या डूरंड लाइन (पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अलग करने वाल सरहद) को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए? इस सवाल के जवाब में कुरैशी ने कहा, 'अगर आप आगे बढ़ना चाहते हैं और अच्छे पड़ोसी की तरह सहअस्तित्व की भावना रखते हैं तो डूरंड लाइन को अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए।'

टोलो न्यूज ने पूछा कि क्या आप इसके लिए अफगानिस्तान के प्रशासन से बात करेंगे? इस पर कुरैशी ने कहा, 'मेरा मानना है कि आप भले घरेलू राजनीति की मजबूरियों के तहत इसे नहीं मानें लेकिन ये सीमा तो है। और मेरा मानना है कि डूरंड लाइन इंटरनेशनल सीमा है। इस पर कोई बातचीत करने की जरूरत नहीं है।'

अफगानिस्तान में हिंसा पर पाकिस्तान ने तालिबान का किया बचाव
साक्षात्कार में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, ‘यदि आप फिर से यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि तालिबान की वजह से हिंसा बढ़ रही है, तो यह एक अतिशयोक्ति होगी। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं? क्या वहां अन्य तत्व नहीं हैं जो स्थिति बिगाड़ने की भूमिका निभा रहे हैं? आईएसआईएस जैसी ताकतें अफगानिस्तान के भीतर हैं। उन्हें युद्ध की स्थिति मे लाभ होता है और वो अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हैं। कुरैशी ने पाकिस्तान में तालिबान नेताओं को पनाह देने की बात को खारिज कर दिया और कहा कि उनके ज्यादातर नेता अफगानिस्तान में हैं।

तालिबान और पाकिस्तान की दोस्ती
जब तक अफगानिस्तान में तालिबान प्रभावी रहा तब उसका दखल काफी रहा लेकिन 9/11 के हमले के बाद स्थिति बदली और अफगानिस्तान में चुनी हुई सरकार आई।चुनी हुई सरकार आने के बाद से पाकिस्तान की स्थिति अफगानिस्तान में कमजोर हुई और वो भारत की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़ा करता रहा है। अफगानिस्तान की सरकार की ओर से पाकिस्तान पर आतंकवादियों को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है।

पिछले महीने ही अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्लाह मोहिब की टिप्पणियों को लेकर पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया था। क़ुरैशी ने यहां तक कह दिया था कि उनका खून खौल रहा है। मोहिब ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते रहे हैं।

अफगानिस्तान से अमेरिका अपने सैनिकों को वापस बुलाने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की है कि 11 सितंबर को अफगानिस्तान से सारे अमेरिकी सैनिक वापस आ जाएंगे। 11 सितंबर ही अमेरिका में अल-क़ायदा के हमले की बरसी है। 

बीस साल यहां रहने के बाद अमेरिकी और ब्रिटिश सेना अफगानिस्तान छोड़ रहीं हैं। अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने घोषणा की थी कि बचे हुए 2,500-3,500 अमेरिकी सैनिक 11 सितंबर तक वापस चले जाएंगे। ब्रिटेन भी अपने बचे हुए 750 सैनिकों को वापस बुला रहा है।

अमेरिका का मानना है कि अलकायदा ने ही उसपर, 9/11 के हमले अफगानिस्तान की धरती से किए थे। उसके बाद अमेरिका के नेतृत्व में योजनाबद्ध तरीके से वहां से तालिबान को सत्ता से हटाया गया और अस्थायी रूप से अलकायदा को बाहर किया गया।

क्या है डूरंड लाइन?
अफगानिस्तान ने डूरंड लाइन को अंतरराष्ट्रीय सीमा के तौर पर मान्यता नहीं दी है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान से लगी सीमा और सिंधु नदी तक के कुछ इलाकों पर अपना दावा करता रहा है।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद की जड़ 19वीं सदी से ही है। ब्रिटिश सरकार ने भारत की उत्तरी हिस्सों पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए 1893 में अफगानिस्तान के साथ 2,640 किलोमीटर की सीमा रेखा खींची थी। ये समझौता ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन विदेश सचिव सर मॉरिटमर डूरंड और अमिर अब्दुर रहमान खान के बीच काबुल में हुआ था। इसी लाइन को डूरंड लाइन कहा जाता है। यह पश्तून इलाका से गुजरती है।

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