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इंडोनेशिया: पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णों की बेटी सुकमावती सुकर्णोपुत्री इस्लाम छोड़ हिंदू धर्म में होंगी शामिल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: सुभाष कुमार Updated Sun, 24 Oct 2021 07:46 PM IST
सार

70 साल की सुकमावती सुकर्णोपुत्री इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णों की तीसरी बेटी और पूर्व राष्ट्रपति पूर्व राष्ट्रपति मेगावती सुकर्णोपुत्री की छोटी बहन हैं। वह इंडोनेशिया में ही रहती है।

इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णों की बेटी सुकमावती सुकर्णोपुत्री।
इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णों की बेटी सुकमावती सुकर्णोपुत्री। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णों की बेटी सुकमावती सुकर्णोपुत्री इस्लाम धर्म को छोड़कर हिंदू धर्म में शामिल होंगी। सीएनएन इंडोनेशिया की खबरों के मुताबिक 26 अक्तूबर 2021 को वह पूजा में शामिल होकर पूरे विधि विधान के साथ हिंदू धर्म को स्वीकार करेंगी। मंगलवार को बाली में सुकर्णो हेरिटेज क्षेत्र में इसके लिए कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 



26 अक्तूबर को अपनाएंगी हिंदू धर्म
70 साल की सुकमावती सुकर्णोपुत्री इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति सुकर्णों की तीसरी बेटी और पूर्व राष्ट्रपति पूर्व राष्ट्रपति मेगावती सुकर्णोपुत्री की छोटी बहन हैं। वह इंडोनेशिया में ही रहती है। उनकी शादी कंजेंग गुस्ती पंगेरन आदिपति आर्य मंगकुनेगारा IX से हुई थी, लेकिन साल 1984 में उनका तलाक हो गया था। वह इंडोशियन नेशनल पार्टी (Partai Nasional Indonesia-PNI) की संस्थापक भी हैं। बाली के अगुंग सिंगराजा में 26 अक्तूबर को 'शुद्धि वदानी' नामक एक कार्यक्रम होगा, यहां सुकमावती हिंदू धर्म अपनाएंगी। 


इशनिंदा का लगा था केस
साल 2018 सुकमावती सुकर्णोपुत्री ने एक कविता साझा की थी, इसे देश के कट्टरपंथियों ने इस्लाम का अपमान बताते हुए इशनिंदा की शिकायत दर्ज कराई थी और माफी की मांग की थी। सुकमावती ने इसके बाद माफी भी मांग ली थी। इंडोनेशिया दुनियाभर में सबसे अधिक इस्लामिक जनसंख्या वाला देश है और यहां इस्लाम धर्म के अनुयायियों की ही बहुलता है।  

दादी से प्रभावित है फैसला
सुकमावती के वकील विटारियोनो रेजसोप्रोजो ने बताया कि उनका यह फैसला उनकी दादी इदा आयु न्योमन राय श्रीम्बेन से प्रभावित है। सुकमावती ने हिंदू  धर्मशास्त्र की अच्छे तरीके से पढ़ाई की है। बाली की यात्रा के दौरान भी सुकमावती हिंदू धार्मिक समारोह में शामिल होती थी। वह लंबे समय से हिंदू धर्म में शामिल होना चाहती थी। उनके परिजनों ने भी उनके इस फैसले को स्वीकार कर लिया है। 

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