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Sri Lanka Crisis: विक्रमसिंघे सरकार पर लगा आंदोलनकारियों के दमन का आरोप, आर्थिक मदद मिलने में बन रहे रुकावट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 05 Aug 2022 06:27 PM IST
सार

Sri Lanka Crisis: कई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विक्रमसिंघे पूर्व सत्ताधारी राजपक्षे परिवार के इशारे पर काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कहा था कि सरकार विरोधी आंदोलन की शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई, लेकिन बाद में आंदोलन हिंसक हो गया...

Sri Lanka Crisis: Ranil Wickremesinghe
Sri Lanka Crisis: Ranil Wickremesinghe - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

श्रीलंका में सरकार विरोधी आंदोलनकारियों के खिलाफ अब कार्रवाई तेज हो गई है। समझा जाता है कि राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के इस बयान के बाद ये कदम उठाए जा रहे हैं कि जब तक आंदोलन का माहौल रहेगा, विदेशी एजेंसियां श्रीलंका को आर्थिक मदद देने के लिए आगे नहीं आएंगी। हालांकि अब विक्रमसिंघे ने दावा किया है कि सरकार विरोधियों के खिलाफ कोई बड़ी मुहिम छेड़ी गई है।


 

श्रीलंका के जाने माने ट्रेड यूनियन नेता जोसेफ स्टालिन को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। स्टालिन श्रीलंका टीचर्स यूनियन के अध्यक्ष हैं। पूर्व राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे के खिलाफ चले देशव्यापी आंदोलन को संचालित करने में उनकी बड़ी भूमिका थी। इसी आंदोलन के कारण पिछले महीने राजपक्षे को देश छोड़ कर भागना पड़ा। उसके बाद पिछले 20 जुलाई को श्रीलंका की संसद ने विक्रमसिंघे को नया राष्ट्रपति चुना था। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि राष्ट्रपति पद संभालने के तुरंत बाद विक्रमसिंघे ने सरकार विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। अब उसे काफी तेज कर दिया गया है।

कई लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर

पुलिसकर्मियों ने बुधवार को यहां गॉल फेस स्थित प्रदर्शनकारियों के ठिकाने पर जाकर उन्हें पांच अगस्त तक वहां से हट जाने को कहा। इस बारे में उन्हें लिखित नोटिस दिया गया है। इस बीच पिछले तीन महीने से भी अधिक समय से जारी विरोध-प्रदर्शनों में शामिल रहे कई लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों के बीच जोसेफ स्टालिन सबसे वरिष्ठ नेता हैं।
 

इसी हफ्ते विक्रमसिंघे ने अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में विरोध प्रदर्शनों को तुरंत समाप्त करने की जरूरत बताई थी। पर्यवेक्षकों की राय है कि विक्रमसिंघे सरकार इसे सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपना रही है। मंगलवार को अमेरिकी मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने सरकार की तरफ से अपनाए जा रहे तौर-तरीकों की कड़ी आलोचना की। इसके बाद बुधवार को विक्रमसिंघे ने संसद में एक बयान दिया। उसमें उन्होंने कहा- ‘कुछ समूह सोशल मीडिया के जरिए बड़े पैमाने पर ये दुष्प्रचार कर रहे हैं कि मैं सरकार विरोधियों को निशाना बना रहा हूं। लेकिन यह सच नहीं है। मैं शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने दूंगा।’

कार्यकर्ताओं का आरोप- राजपक्षे के इशारे पर काम कर रहे विक्रमसिंघे

कई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विक्रमसिंघे पूर्व सत्ताधारी राजपक्षे परिवार के इशारे पर काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कहा था कि सरकार विरोधी आंदोलन की शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई, लेकिन बाद में आंदोलन हिंसक हो गया। कुछ राजनीति प्रेरित गुट इस आंदोलन के संचालक बन गए। विक्रमसिंघे ने कहा था- मैं हिंसा और आतंकवाद को नहीं चलने दूंगा। आरोप है कि ऐसे बयानों के बाद ही आंदोलनकारियों का दमन शुरू हुआ।

 

ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगली ने बुधवार को कहा- ‘ऐसा लगता है कि सरकार गैर-कानूनी प्रयास कर रही है, ताकि वह देश में जारी आर्थिक संकट से लोगों का ध्यान हटा सके।’ उधर आंदोलनकारियों ने इसे बिल्कुल झूठ बताया है कि विक्रमसिंघे अहिंसक विरोध का संरक्षण कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी ने वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.काम से कहा- ‘राष्ट्रपति ने कानून-व्यवस्था लागू करने के नाम पर अभिव्यक्ति की आजादी का दमन शुरू कर दिया है।’ आंदोलनकारियों का यह इल्जाम भी है कि विक्रमसिंघे राजपक्षे परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में नरम रुख अपनाए हुए हैं।

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