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Sayed Hoosen Mia: भारतीय मूल के दक्षिण अफ्रीकी समाजसेवी सैयद हुसैन मियां का 76 वर्ष की आयु में निधन

पीटीआई, जोहान्सबर्ग। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 18 Aug 2022 03:16 AM IST
सार

 मियां ने 1950 के दशक में जोहान्सबर्ग के दक्षिण में बने लेनासिया के विशाल भारतीय टाउनशिप में एक शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। मियां ने उस समय अपने छोटे से वेतन के हिस्से का उपयोग करते हुए लेनासिया के भीतर थॉमसविले के स्लम क्षेत्र में रहने वाले भारतीय बच्चों की शिक्षा का समर्थन किया था।

सैयद हुसैन मियां (फाइल फोटो)।
सैयद हुसैन मियां (फाइल फोटो)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

भारतीय मूल के दक्षिण अफ्रीकी समाजसेवी और सेवानिवृत्त व्यवसायी सैयद हुसैन मियां का बुधवार को 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन पर देश भर में दक्षिण अफ्रीकी लोगों ने शोक व्यक्त किया। मियां ने 1950 के दशक में जोहान्सबर्ग के दक्षिण में बने लेनासिया के विशाल भारतीय टाउनशिप में एक शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। मियां ने उस समय अपने छोटे से वेतन के हिस्से का उपयोग करते हुए लेनासिया के भीतर थॉमसविले के स्लम क्षेत्र में रहने वाले भारतीय बच्चों की शिक्षा का समर्थन किया था, लेकिन उनकी असली दिलचस्पी दूसरे क्षेत्रों में थी। इसलिए, वह जल्द ही बीमा के क्षेत्र में चले गए और एक दुर्जेय टीम का विकास किया। उनकी टीम ने साल दर साल राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए पुरस्कार जीते।


यहां भी उन्होंने जो कुछ भी अर्जित किया उसे लोगों की मदद करने में लगा दिया। उन्होंने हमेशा इस तत्त्वज्ञान का पालन किया कि जो कुछ भी कमाओ उसे लोगों के बीच बांटो। उन्होंने हिंदू समन्वय परिषद के वार्षिक दिवाली महोत्सव और तमिल फेडरेशन ऑफ गौतेंग (Gauteng) के लिए नई मस्जिदों और शैक्षिक और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला के रूप में अलग-अलग संगठनों को मदद पहुंचाया था। भारतीय समुदाय के नेताओं ने गुरुवार सुबह मिया के अंतिम संस्कार से पहले उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।



हिंदू समन्वय परिषद के अध्यक्ष किशोर बादल ने कहा कि मियां ने कई सामुदायिक परियोजनाओं में आर्थिक मदद की थी। इसलिए अक्सर लोग उन्हें 'सोने के दिल' (Heart of Gold) वाला व्यवसायी कहते थे, यह उपाधी उनकी योग्यता का प्रमाण है। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद युग के दौरान लेनासिया में महत्वपूर्ण रूप से आवास की कमी होने पर, मियां ने लोगों के लिए एक हजार किफायती घर बनाने के लिए न केवल पहली निजी क्षेत्र की कुछ परियोजनाओं को शुरू किया, बल्कि बिजली और पानी के कनेक्शन के लिए आवश्यक जमा राशि देकर सहायता भी की।

सामुदायिक समाचार पत्र लेनासिया टाइम्स के संपादक वसीम कैमरूडीन ने कहा कि "कई लोगों का कहना है कि 50 वर्षों से किसी ने भी धार्मिक या अन्य संबद्धता के बावजूद, व्यापक क्षेत्रों में समुदाय के उत्थान के लिए मिया के योगदान की बराबरी नहीं की है। लेनासिया टाइम्स के पृष्ठ इस बात के प्रमाण हैं।" तमिल फेडरेशन ऑफ गौतेंग के पूर्व अध्यक्ष नदास पिल्ले ने कहा कि जब भी हमने उनसे मदद मांगी, उन्होंने कभी मना नहीं किया। मियां ने यह नहीं देखा कि आप कौन हैं। उन्होंने सिर्फ उस काम के तरीके को देखा, जिससे समुदाय को फायदा हो रहा हो। 

मियां को पिछले कुछ वर्षों में कई पुरस्कार और प्रशंसा मिली है, जिसमें रोटरी इंटरनेशनल से बेशकीमती पॉल हैरिस पुरस्कार भी शामिल है। उनके परिवार में पत्नी फरीदा, तीन बेटे, एक बेटी और कई पोते-पोतियां हैं।

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