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Salman Rushdie: जानें कौन हैं सलमान रुश्दी, जो तीन दशक से ज्यादा समय से मौत के फतवे के साये में जी रहे

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 12 Aug 2022 10:47 PM IST
सार

सलमान रुश्दी भारतीय मूल के हैं। देश की आजादी से करीब दो महीने पहले 19 जून,1947 को उनका जन्म मुंबई में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से कश्मीर का था।

प्रख्यात लेखक सलमान रुश्दी
प्रख्यात लेखक सलमान रुश्दी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

साहित्य और दुनिया से राब्ता रखने वाला शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जो सलमान रुश्दी को न जानता हो। वे अपनी कलम से शानदार कहानियां रचते हैं लेकिन कई बार उनकी बेबाकी विवाद का विषय बन जाती है। पश्चिमी न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में स्टेज पर ही उनपर चाकू से हमला किया गया जिससे एक बार फिर वह चर्चाओं में हैं। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं। 


मुंबई में हुआ सलमान रुश्दी का जन्म
सलमान रुश्दी भारतीय मूल के हैं। देश की आजादी से करीब दो महीने पहले 19 जून,1947 को उनका जन्म मुंबई में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से कश्मीर का था। उनके पिता नई दिल्ली में एक सफल कारोबारी बन गए थे इसलिए परिवार इस स्थिति में आ पाया कि वह अपने 14 साल के बेटे को पढ़ाई के लिए ब्रिटिश पब्लिश स्कूल भेज सके।


ब्रिटिश नागरिकता और किंग्स कॉलेज में पढ़ाई
इसके बाद 1964 में रुश्दी ने ब्रिटिश नागरिकता ले ली और अपनी मातृभाषा पश्तो के बदले अंग्रेजी में लिखा शुरू किया। रुश्दी ने कैंब्रिज के किंग्स कॉलेज में पढ़ाई की और थिएटर का कोर्स किया।  

इसके बाद अपने करियर की शुरुआत रुश्दी ने पत्रकार, अभिनेता और विज्ञापन टेक्स्ट लेखक के रूप में की। लेकिन विज्ञापन एजेंसी का काम उन्हें ज्यादा पसंद नहीं आया। 

'मिडनाइट चिल्ड्रेन' से मिली अंतरराष्ट्रीय ख्याति
उन्होंने अपना पहला उपन्यास 'ग्रिमस' प्रकाशित किया लेकिन दूसरे उपन्यास 'मिडनाइट चिल्ड्रेन' से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली। यह उपन्यास भारत की आजादी और विभाजन की पृष्ठभूमि में लिखा गया था। बाद में इस उपन्यास के लिए उन्हें बुकर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। यह उपन्यास अमेरिका और ब्रिटेन में बेस्ट सेलर साबित हुई। सलमान रुश्दी ने एक दर्जन से ज्यादा उपन्यास, ढेर सारे निबंध और आत्मकथा लिखी हैं। 

अस्मिता, सच, आतंक और झूठ पर अंतिम उपन्यास
सलमान रुश्दी ने 'गोल्डन हाउस' नाम का उपन्यास भी लिखा है जिसमें बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने से लेकर ट्रंप के राष्ट्रपति बनने तक एक युवा अमेरिकी फिल्मकार की कहानी है। इसके प्रकाशन से पहले रुश्दी ने कहा था कि अस्मिता, सच, आतंक और झूठ पर यह उनका अंतिम उपन्यास होगा। 

ब्रिटिश महारानी ने 'सर' उपाधि से नवाजा
सलमान रुश्दी को साल 2007 में ब्रिटिश महारानी ने सर की उपाधि से सम्मानित किया था।  साहित्य जगत की सेवा के लिए उन्हें ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने 'कम्पेनियन ऑफ ऑनर' से नवाजा था। 

सर्वादिक विवादों में रहा उपन्यास : द सैटेनिक वर्सेज
सलमान रुश्दी अपने उपन्यास 'शैतानी आयतें" (द सैटेनिक वर्सेज) से सबसे ज्यादा विवादों में रहे। उनके खिलाफ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने मौत का फतवा जारी किया था। इस फतवे को झेलने वाले रुश्दी ने कहा था- इस सूची में शामिल होना सम्मान की बात है। 

'शैतानी आयतें' के लेखक रुश्दी पर अभी भी चालीस लाख डॉलर का ईनाम है। पिछले सालों ईरान और पश्चिम के बीच रिश्तों के सामान्य होने के बावजूद इनाम की रकम बढ़ा दी गई थी। रुश्दी 12 साल तक ब्रिटिश एजेंटों की सुरक्षा में रहे हैं। 21 सदी में प्रवेश करने के साथ ही रुश्दी ब्रिटेन छोड़कर अमेरिका चले गए थे। 2002 से वे बिना किसी सुरक्षा के रहते हैं। सुरक्षाकर्मी उनके साथ तभी नजर आते हैं जब वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में होते हैं।

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