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Salman Rushdie: सलमान रुश्दी पर हमले के नतीजों से मुश्किल है ईरान का बच पाना, मामले से दूरी बनाने की कोशिश की

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: स्वप्निल शशांक Updated Tue, 16 Aug 2022 03:04 PM IST
सार

पश्चिमी देशों में ईरान के रुख को लेकर आलोचना का भाव है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने एक बयान में कहा- ‘ईरान की सरकारी संस्थाओं ने पीढ़ियों से रुश्दी के खिलाफ हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई। सरकार से जुड़े मीडिया ने हमले पर खुशी का इजहार किया। यह निंदनीय है।’

सलमान रुश्दी
सलमान रुश्दी - फोटो : social media
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विस्तार

ईरान के कट्टरपंथी तबकों ने मशहूर लेखक सलमान रुश्दी पर अमेरिका में हुए हमले का स्वागत किया है, लेकिन ईरान सरकार ने इस मामले से खुद को अलग करने की कोशिश की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक रुश्दी पर किसने हमला किया, इस बारे में ईरान सरकार को कोई जानकारी नहीं है। प्रवक्ता नासीर कनानी ने कहा- ‘अमेरिकी मीडिया में जो बातें छपी हैं, उनके अलावा हमें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नही है। दूसरे लोगों की तरह हम भी इस खबर पर नजर रखे हुए हैं।’


कनानी ने रुश्दी के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया
इस हमले के लिए कनानी ने रुश्दी और उनके समर्थकों को ही जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा- 'रुश्दी ने मुसलमानों की आस्था का असम्मान करते हुए खुद अपने लिए दुश्मन पैदा किए। उनके खिलाफ जो गुस्सा पैदा हुआ, वह सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं था।' आरोप है कि रुश्दी के उपन्यास सैटैनिक वर्सेज में इस्लाम का अपमान करने वाली बातें कही गई हैं। 1989 में जब ये उपन्यास प्रकाशित हुआ, तब ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह रुहेल्लाह खुमैनी ने रुश्दी की हत्या का फतवा जारी किया था। 


ईरान मामले से खुद को अलग करने की कोशिश कर रहा
अयातुल्लाह खुमैन की मृत्यु के बाद से ही ईरान सरकार इस मामले से खुद को अलग करने की कोशिश में रही है। अब तक मिली खबरों के मुताबिक पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान रुश्दी पर हमला करने वाले 24 वर्षीय हादी मातार का ईरान से कोई रिश्ता नहीं है। उसके माता-पिता लेबनान से अमेरिका आए थे, लेकिन ईरान के पर्यवेक्षकों ने इस बात पर हैरत जताई है कि ये हमला उस समय हुआ, जब ईरान परमाणु डील पर बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिश की जा रही है। समझा जाता है कि ये वार्ता अब अपने आखिरी दौर में है। 

वियना में चल रही वार्ता ठहर सकती है
परमाणु डील के समर्थकों को आशंका है कि इस हमले के बाद अब वियना में चल रही वार्ता फिर से ठहर सकती है, जबकि देश में एक तबका ऐसा है, जिसने इस हमले पर खुशी जताई है। काहयान नाम के एक अखबार के एक प्रधान संपादक ने एक टिप्पणी में लिखा- ‘जिस व्यक्ति ने अल्लाह के दुश्मन के गले को जख्मी किया, उसके हाथों को अवश्य चूमा जाना चाहिए।’ इस अखबार के प्रधान संपादक की नियुक्ति ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता करते हैं। उधर खोरासान नाम के एक खबर ने अपनी खबर की हेडलाइन दीः ‘शैतान को नरक के रास्ते पर भेजा’।

ईरान के रुख की हो रही आलोचना
पश्चिमी देशों में ईरान के रुख को लेकर आलोचना का भाव है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने एक बयान में कहा- ‘ईरान की सरकारी संस्थाओं ने पीढ़ियों से रुश्दी के खिलाफ हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई। सरकार से जुड़े मीडिया ने हमले पर खुशी का इजहार किया। यह निंदनीय है।’

कीमत चुकानी पड़ सकती है
ऐसे बयानों से ईरान के उन लोगों को चिंता हुई है, जो हमले को अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ मानते हैं। खास कर नौजवान पीढ़ी को रुश्दी या उनसे जुड़े विवाद की ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन अब ऐसे संकेत हैं कि चाहे-अनचाहे रुश्दी पर हुए हमले से ईरान का नाम जुड़ गया है। इसकी देश को महंगी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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