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अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की एंट्री से टेंशन में रूस, करजई बोले- चनावों से ज्यादा शांति जरूरी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 27 Sep 2019 07:47 PM IST
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Afghan Elections
Afghan Elections - फोटो : File Photo
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अफगानिस्तान में आखिर वही हुआ जिस बात की आशंका जताई जा रही थी। राष्ट्रपति ट्रंप और तालिबान के बीच फिर से शांति वार्ता शुरू करने की कोशिशों के बीच रूस ने माना है कि उत्तरी अफगानिस्तान इस्लामिक स्टेट का अड्डा बन रहा है। वहीं अफगान राष्ट्रपति चुनावों को लेकर भी तालिबान समेत वहां के कई नेताओं ने चिंता जाहिर की है। इन नेताओं का कहना है कि चुनावों से अफगान समस्या को बढ़ावा मिलेगा।

फल-फूल रहे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान कहा कि उत्तरी अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट खुरासान और दूसरी अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन वहां पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वहां उनके फलने-फूलने को लेकर नया जोखिम पैदा हो गया है। लावरोव का कहना है कि सोवियत गणराज्य के बाद का एक सैन्य गुट- सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ)- और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) दोनों ने अफगानिस्तान से पैदा हो रहे खतरों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। विश्लेषण में सामने आया है कि अफगानिस्तान के उत्तर में आईएस की अगुवाई में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं।

आर्थिक सहयोग का जोखिम नहीं

साथ ही, लावरोव ने कहा कि अफगानिस्तान को उन खतरों व चुनौतियों से निपटने के लिए पार पाने के लिए बाहरी सहायता की जरूरत है। वहीं उन्होंने भी कहा कि जब तक वहां ऐसे खतरे हैं तब तक अफगानिस्तान के साथ आर्थिक सहयोग का जोखिम नहीं उठाया जा सकता है। गौरतलब है कि ट्रंप के तालिबानी नेताओं के साथ शांति वार्ता खत्म होने के बाद तालिबानी नेताओं ने मास्को की यात्रा की थी और आगे की रणनीति पर बातचीत की थी।

20 जिलों में वोटिंग का बहिष्कार

वहीं शानिवार को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से ठीक पहले अफगानिस्तान में मुख्यधारा की राजनीति करने वाले कुछ नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा है कि चुनावों से अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि चुनावों से ज्यादा उनके लिए शांति महत्वपूर्ण है। तालिबान पहले ही चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की धमकी दे चुका है और वहां चार प्रांतों के 20 जिलों में वोटिंग का बहिष्कार किया गया है।

गहरी हिंसा में धकेल सकते हैं चुनाव

चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ बोलने वाले नेताओं में पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी हैं। एक इंटरव्यू में करजई ने कहा कि मौजूदा हालात में राष्ट्रपति चुनाव अफगानिस्तान को गहरी हिंसा में धकेल सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमें अफगानिस्तान में पहले शांति के लिए आगे आना चाहिए, उनके बाद चुनावों की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हम एक ऐसे देश में चुनाव नहीं करा सकते, जो एक विदेशी की तरफ से थोपे गए संघर्ष से गुजर रहा है। करजई ने कहा कि यह हमारा संघर्ष नहीं है, हम केवल विदेशी उद्देश्यों और हितों की लड़ाई में पिस रहे हैं और इसमें मर रहे हैं।

शांति प्रस्ताव पर काम

वहीं जमायत-ए-इस्लामी पार्टी के एक नेता मोहम्मद इस्माइल खान ने कहा कि आने वाले चुनाव अफगानियों को मंजूर नहीं हैं और वे यहां कि एकता नष्ट कर कर देंगे। इस्माइल खान पहले करजई प्रशासन में उच्च पद पर रह चुके हैं। महाज-ए-मिल्ली पार्टी के चेयरमैन सैयद हामेद गैलानी का कहना है कि हमें चुनावों की समीक्षा करनी चाहिए और पहले शांति की तरफ बढ़ना चाहिए। शीर्ष नेताओं का यह भी कहना है कि वे एक शांति प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं, जिसकी जानकारी अगले कुछ दिनों में साझा की जाएंगी।

पाक-अफगान सीमा को दो दिन के लिए बंद

अफगानिस्तान में शनिवार को चौथे राष्ट्रपति चुनावों के लिए होने वाली वोटिंग के दौरान पहले ही हिंसा की आशंका जताई जा रही है। एहतियात के तौर पर पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा को दो दिन के लिए बंद कर दिया गया है। तालिबान ने धमकी दी है कि उसके लड़ाके वोटिंग  के दौरान पोलिंग बूथ को निशाना बनाएंगे। तालिबान नहीं चाहता कि शांति वार्ता फिर शुरू होने पहले वहां राष्ट्रपति चुनाव हों और उसकी भागीदारी शून्य हो। पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति अशरफ गनी को निशाना बना कर एक हमला भी किया गया था, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी, वहीं गुरुवार को भी कंधार में दूसरी बार गनी के चुनाव कार्यालय में हमला किया गया था।

19 अक्तूबर को परिणाम

चुनाव में मतदान के लिए 5 हजार पोलिंग स्टेशन केंद्र बनाए जाएंगे। देशभर में 72 हजार सुरक्षा बलों को मतदान केंद्रों की सुरक्षा में तैनात किया जाएगा। मतदान की तैयारी पूरी हो चुकी है, यह अब तक का सबसे साफ सुथरा राष्ट्रपति चुनाव होगा। इसके लिए चुनाव कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। चुनाव का परिणाम 19 अक्तूबर को आएगा। 50 फीसदी से ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाएगा।

2014 में जमकर पड़े थे वोट

2014 के चुनावों के मुकाबले इस बार के चुनावों को लेकर लोगों में ज्यादा उत्साह नहीं देखा जा रहा है। पिछले चुनावों में भी तालिबान ने चुनावों का बहिष्कार करके हुए लोगों को वोट न देने की चेतावनी दी थी, लेकिन लोगों ने जमकर हिस्सा लिया था। जिसके बाद वर्ल्ड बैंक के पूर्व अर्थशाष्त्री अशरफ गनी देश के राष्ट्रपति चुने गए थे।
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