...तो इस वजह से बार- बार सत्ता पर काबिज हो जाते हैं रूसी राष्ट्रपति पुतिन 

बीबीसी हिंदी Updated Fri, 09 Feb 2018 05:32 PM IST
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन - फोटो : AFP
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अगर आप जासूसी थ्रिलर्स के शौकीन हैं तो एफएसबी यानी फेडरल सिक्योरिटी सर्विस के बारे में आपको जरूर पता होगा। रूस की सत्ता पर व्लादिमीर पुतिन की पकड़ को एफएसबी से जोड़कर देखा जा सकता है। रूस की इस खुफिया सेवा को दुनिया भर में उसके इंटेलिजेंस नेटवर्क और चरमपंथ विरोधी अभियानों के लिए जाना जाता है। लेकिन पूर्व सोवियत संघ की खुफिया पुलिस केजीबी में इसकी जड़ों के कारण एफएसबी पर आरोप भी लगते रहे हैं। 
सरकार की रजामंदी से होने वाले कत्ल और राष्ट्रपति से नजदीकी रिश्ते, ये वो बातें हैं जिनकी वजह से इसके मकसद और अजेंडे पर सवाल उठते रहे हैं। कई लोगों को इस बात में दिलचस्पी रहती है कि आखिर एफएसबी करता क्या है। इसके कुछ जवाब यहां हैं:

चरमपंथ और जासूसी के खिलाफ
फेडरल सिक्योरिटी सर्विस का गठन 1995 में किया गया था। रूस की तरफ बढ़ने वाले खतरों से निपटने की जिम्मेदारी एफएसबी को दी गई थी। व्लादिमीर पुतिन सत्ता में आने से पहले तक एफएसबी के चीफ हुआ करते थे। संगठित अपराध और चरमपंथियों के खिलाफ एफएसबी दुनिया के दूसरे पुलिस संगठनों से सहयोग करता है।

चेचेन्या में अलगाववादी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में नब्बे और 2000 के दशक के दौरान एफएसबी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। सोवियत संघ से अलग होने वाले कई देशों के साथ रूस के तल्ख रिश्ते रहे हैं। एफएसबी का एक काम ये भी था कि रूस में पश्चिम समर्थक आवाजें ज्यादा जोर न पकड़ें जैसा कि 2003 में जॉर्जिया में 'रोज क्रांति' और 2004 में यूक्रेन में 'ऑरेंज क्रांति' के तौर पर हुआ था। 
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एफएसबी की भूमिका

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