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रोहिंग्या संकट: म्यांमार सेना ने पहली बार माना, हिंसा में शामिल थे सैनिक

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Updated Thu, 11 Jan 2018 03:22 PM IST
Rohingya Crisis: Bangladeshi Army admitted that they were involved in massacre
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म्यांमार सेना ने पहली बार माना है कि उसके सैनिक रखाइन प्रांत में भड़की हिंसा के दौरान रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या में शामिल थे। हालांकि सेना ने सिर्फ एक मामले में यह संलिप्तता स्वीकार की है। सेना के मुताबिक़, जांच में पाया गया है कि म्यांगदो के इन दीन गांव में 10 लोगों की हत्या में सुरक्षा बलों के चार जवान शामिल थे।
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सेना की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चारों जवानों ने प्रतिशोध के तौर पर, उनके शब्दों में 'बंगाली आतंकवादियों' पर हमला करने में ग्रामीणों की मदद की थी। सेना रोहिंग्या चरमपंथियों के लिए 'बंगाली आतंकवादी' शब्द का इस्तेमाल करती है।

सेना पर जातीय नरसंहार के आरोप

म्यांमार सेना पर रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ जातीय नरसंहार के आरोप हैं। पिछले साल अगस्त में भड़की हिंसा के बाद से साढ़े छह लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान रखाइन से भागकर पड़ोस के बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं। हिंसा के दौरान सामूहिक हत्याओं, बलात्कार और अत्याचार की दर्दनाक कहानियां सामने आई थीं।

रोहिंग्या मुसलमानों का आरोप है कि सेना और स्थानीय बौद्धों ने मिलकर उनके गांव जला दिए और उन पर हमले किए। सेना ने आम लोगों पर हमले करने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उसने सिर्फ रोहिंग्या चरमपंथियों को निशाना बनाया था।

म्यांमार ने पत्रकारों और बाहरी जांचकर्ताओं को रखाइन प्रांत में स्वतंत्र रूप से घूमकर पड़ताल की इजाज़त नहीं दी थी।

कब्र से मिले थे दस कंकाल

सेना ने पिछले महीने ऐलान किया था कि वह इन दीन गांव में एक क़ब्र से मिले दस कंकालों के मामले की जांच करेगी। अब सेना की रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है, "यह सच है कि गांव वालों और सुरक्षा बलों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने दस बंगाली आतंकवादियों की हत्या की।"

हालांकि सेना ने यह भी कहा है, "यह घटना इसलिए हुई क्योंकि आतंकवादियों ने बौद्ध ग्रामीणों को धमकाया और उकसाया था।"

नवंबर में किया था आरोपों से इनकार

अगस्त के बाद से यह पहली बार है, जब म्यांमार सेना ने आम रोहिंग्या लोगों की हत्याओं में शामिल होने की बात स्वीकारी है। सेना पर हत्या के साथ, गांव जलाने, बलात्कार और लूटपाट के आरोप भी लगे थे, लेकिन नवंबर में सेना ने सभी आरोपों से साफ इनकार कर दिया था।

रखाइन प्रांत में अत्याचार के स्पष्ट सबूतों के बावजूद म्यांमार प्रशासन अब तक एक ही सामूहिक क़ब्र खोज पाया है जो 28 हिंदुओं की बताई गई है। प्रशासन ने इसके लिए रोहिंग्या चरमपंथियों को ज़िम्मेदार बताया है।

ऐसी अटकलें भी हैं कि दिसंबर में समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो रिपोर्टरों को हिरासत में लेने के पीछे यह वजह भी हो सकती है कि उन्हें इन दीन में हुए नरसंहार की जानकारी मिल गई थी।

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